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Father's Day Special: पिता सिर्फ एक इंसान नहीं बल्कि वो बरगद का पेड़ हैं, जिसकी छांव जिंदगी भर साथ निभाती है

फादर्स डे के खास मौके पर जानिए पिता के उस मौन प्रेम और संघर्ष की कहानी, जो बिना कुछ कहे हमारे पूरे जीवन को संवार देते हैं। माँ के आंचल के साथ पिता का आसमान क्यों जरूरी है, आइए महसूस करें।

 
 

पिता की डांट बनी ढाल

अधूरे सपनों को देते उड़ान

बिना शिकायत जिम्मेदारियां निभाते पापा

पिता का त्याग सबसे महान

बदले में सिर्फ सम्मान चाहना

जब भी हम जिंदगी में किसी सबसे मजबूत, निस्वार्थ और चुपचाप काम करने वाली ताकत के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहला चेहरा हमारे पापा का ही सामने आता है। पिता सिर्फ एक इंसान का नाम नहीं है, बल्कि वो अपने आप में एक पूरी संस्था हैं। वे हमारे घर की उन दीवारों की तरह मजबूत होते हैं जो ऊपर से तो दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनके बिना पूरा घर असुरक्षित हो जाता है। पिता उस दीपक की तरह हैं जो खुद जलकर अपने बच्चों की राह में उजाला करते हैं।

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माँ का आंचल और पिता का आसमान
अक्सर दुनिया में माँ के प्यार की बहुत बातें होती हैं और यह सही भी है, क्योंकि माँ ममता की मूरत होती है। लेकिन एक पिता का प्यार शब्दों से नहीं बल्कि उनकी जिम्मेदारियों से दिखाई देता है। माँ हमें आंचल देती है तो पिता हमें खुला आसमान देते हैं। माँ अगर हमें उंगली पकड़कर चलना सिखाती है, तो पिता हमें गिरकर दोबारा खड़े होने का हौसला देते हैं। माँ भावनाओं का संसार है तो पिता हमें मुश्किलों से लड़ना सिखाते हैं।

वक्त के साथ बदलती पिता की अहमियत
बचपन में कई बार हमें लगता है कि पापा बहुत कड़क हैं, वो हमारी हर जिद पूरी नहीं करते और बात-बात पर डांटते या टोकते हैं। उस समय हमें उनका अनुशासन बुरा लगता है। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं और जिंदगी की कड़ी धूप का सामना करते हैं, तब समझ आता है कि पिता की वो डांट दरअसल हमें मुसीबतों से बचाने वाली ढाल थी।

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बच्चों के लिए अपने सपनों की कुर्बानी
एक बच्चा जब छोटा होता है तो उसे लगता है कि उसके पापा दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान हैं। फिर जब वो जवान होता है, तो उसे लगता है कि पापा पुरानी सोच के हैं। लेकिन जब उसी बच्चे पर खुद परिवार की जिम्मेदारी आती है, तब उसे अहसास होता है कि पिता कितने सही थे। पिता अपने अधूरे सपनों को बच्चों की आँखों से पूरा होते देखना चाहते हैं। वे अपनी खुशियां और आराम छोड़कर सिर्फ अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में जुट जाते हैं।

बिना शिकायत परिवार का बोझ उठाना
यह कितनी अजीब बात है कि घर में सबसे कम शिकायत करने वाला इंसान हमेशा पिता ही होता है। उनकी थकान या उनका तनाव कभी घर में चर्चा का विषय नहीं बनता। वे सुबह सबसे पहले जागते हैं और रात को सबसे बाद में सोते हैं। बच्चों की स्कूल फीस, घर का राशन, किराया और दवाइयों का पूरा हिसाब उनके दिमाग में चलता रहता है, लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है ताकि परिवार में कोई परेशान न हो।

बेटी की विदाई और बेटे की कामयाबी
जब एक पिता अपनी लाडली बेटी को विदा करता है, तो उसके दिल के दर्द को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। वो बाहर से मुस्कुराकर मेहमानों का स्वागत करता है, लेकिन अंदर ही अंदर एक कोमल विछोह को सह रहा होता है। वहीं जब बेटा कामयाब होता है, तो सबसे ज्यादा गर्व पिता को ही होता है। वो भले ही सबके सामने तालियां न बजाएं, लेकिन उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

बदलते दौर में संस्कारों की जरूरत
आज का जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है। तकनीक और सुविधाएं तो बढ़ गई हैं, लेकिन परिवारों में आपस का बातचीत का दौर कम हो गया है। ऐसे समय में पिता की भूमिका और बड़ी हो जाती है। बच्चे इंटरनेट से बहुत कुछ सीख सकते हैं, लेकिन ईमानदारी, मेहनत, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे जीवन के असली मूल्य वे अपने पिता को देखकर ही सीखते हैं।

बुढ़ापे में सिर्फ साथ की उम्मीद
आज के समय में यह दुखद है कि लोग माता-पिता को सिर्फ जरूरत के वक्त याद करते हैं। जबकि सच तो यह है कि बुजुर्ग होने पर पिता को पैसों से ज्यादा अपने बच्चों के समय, सम्मान और प्यार की जरूरत होती है। वे चाहते हैं कि कोई उनके पास बैठे, उनकी बातें सुने और उनके अनुभवों की कद्र करे। जब पिता दुनिया से चले जाते हैं, तब हमें उनकी असली कमी खलती है।

फादर्स डे पर लें एक छोटा सा संकल्प
पिता की तुलना हम एक ऊंचे पहाड़ से कर सकते हैं, जो खुद आंधी-तूफान सहता है लेकिन नीचे रहने वालों को सुरक्षा देता है। फादर्स डे सिर्फ साल में एक दिन मैसेज भेजने का दिन नहीं है। यह उस इंसान के प्रति आभार जताने का मौका है जिसने हमारे जीवन की नींव रखी। आइए, इस फादर्स डे पर सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें, बल्कि अपने पापा के पास बैठें, उनसे बातें करें और कहें कि हम उनसे कितना प्यार करते हैं। क्योंकि अगर माँ जीवन की सुंदर कविता है, तो पिता उसका असली अर्थ हैं।

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