हरदोई सनबीम स्कूल विवाद: प्रबंधन संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग, वायरल वीडियो के बाद मचा बवाल
हरदोई के न्यू सनबीम पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा का अभिभावक के साथ बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा मच गया है। विरोध के बीच प्रिंसिपल ने माफी मांगी है और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
न्यू सनबीम पब्लिक स्कूल हरदोई विवाद
प्रिंसिपल ममता मिश्रा ने मांगी माफी
अभिभावक के साथ अभद्र व्यवहार मामला
प्रशासन की ओर से जांच शुरू
विद्यालय प्रबंधक संघ की निष्पक्ष जांच
उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद स्थित 'न्यू सनबीम पब्लिक स्कूल, अहिरोरी' से जुड़ा एक मामला इन दिनों शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। विद्यालय की प्रिंसिपल ममता मिश्रा का एक अभिभावक के साथ अभद्र व्यवहार करने का वीडियो 26-27 अप्रैल 2026 को वायरल हुआ, जिसके बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश देखा गया। वीडियो में प्रिंसिपल को अभिभावक के साथ ऊंची आवाज में 'शट अप' और 'गेट लॉस्ट' जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए देखा गया था, जब अभिभावक बाहर से किताबें खरीदने के संबंध में सवाल कर रहे थे।
प्रशासन और विरोध का असर
वायरल वीडियो ने देखते ही देखते तूल पकड़ लिया। इस घटना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने स्कूल परिसर में पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू कर दी है। प्रशासनिक आदेश के तहत प्रिंसिपल ममता मिश्रा के स्कूल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और अंततः उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी है।
विद्यालय प्रबंधक संघ की निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण पर विद्यालय प्रबंधक संघ ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. विनय कुमार वर्मा ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी निर्णय से पहले संतुलन और धैर्य जरूरी है। उन्होंने कहा, "किसी एक वायरल वीडियो के आधार पर बिना समुचित जांच के पूरे विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था और वर्षों की उपलब्धियों को कटघरे में खड़ा करना न्यायोचित नहीं है।"
संघ ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की पारदर्शी जांच की जाए। साथ ही, जांच के दौरान विद्यालय में अध्ययनरत वर्तमान विद्यार्थियों और पूर्व वर्षों के अभिभावकों से भी स्कूल की कार्यप्रणाली और व्यवहार संबंधी अनुभवों के आधार पर राय ली जानी चाहिए। संघ का मानना है कि किसी भी संस्था का मूल्यांकन उसके दीर्घकालीन योगदान को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
संघ का कहना है कि किसी भी अभिभावक के साथ सार्वजनिक रूप से कठोर व्यवहार या अपमानजनक भाषा का प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। विद्यालयों को सदैव संवाद, संयम और गरिमा का वातावरण बनाए रखना चाहिए। यदि किसी स्तर पर संवाद की मर्यादा भंग हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी तथ्य सामने आएँ, उसी के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी है। यह घटना स्पष्ट करती है कि शैक्षिक संस्थानों में संवाद की मर्यादा बनाए रखना कितना आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं, ताकि शिक्षा संस्थानों के प्रति समाज का विश्वास कायम रह सके।
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