ऐसे भी कुछ दर्द होते हैं, जो दिखाई नहीं देते: जानिए स्वास्थ्य से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई
मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक सेहत जितना ही जरूरी है। समाज में आत्महत्या और डिप्रेशन को लेकर कई गलत अवधारणाएं फैली हैं। जानिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार मानसिक तनाव से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनकी असल सच्चाई।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े 5 बड़े मिथक
डिप्रेशन और आत्महत्या के शुरुआती संकेत
टोल फ्री नंबर 14416 पर सहायता
मानसिक तनाव में अपनों का साथ जरूरी
भावनात्मक दर्द को न करें नजरअंदाज
हमारे जीवन में मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। इसके बावजूद समाज में मानसिक परेशानी को लेकर आज भी कई तरह की गलतफहमियां और हिचकिचाहट बनी हुई है। खासकर डिप्रेशन और आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषयों पर बात करने से लोग बचते हैं। यही चुप्पी पीड़ित व्यक्ति को और अधिक अकेला बना देती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा कर मानसिक पीड़ा से जुड़े 5 प्रमुख मिथकों और उनके पीछे के तथ्यों को उजागर किया है।
मिथक 1: जो लोग बात करते हैं, वे ऐसा कदम नहीं उठाते
अक्सर माना जाता है कि जो लोग आत्महत्या की बात करते हैं, वे सिर्फ ध्यान खींचना चाहते हैं।
तथ्य: गहरे मानसिक तनाव से जूझ रहा व्यक्ति सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अपने विचार और परेशानी व्यक्त कर सकता है। ऐसे किसी भी संकेत को हलके में न लें और उसे गंभीरता से सुनें।
मिथक 2: बात करने से विचार मन में आ सकता है
कई लोगों को लगता है कि अगर किसी से आत्महत्या के बारे में पूछा जाए, तो उसके मन में यह विचार आ सकता है।
तथ्य: संवेदनशीलता और बिना कोई राय बनाए खुलकर बात करने से व्यक्ति को अपनी भावनाएं साझा करने का मौका मिलता है। कई बार सिर्फ किसी का ध्यान से सुनना ही इंसान को राहत दे देता है।
मिथक 3: कदम उठाने वाला व्यक्ति मन बना चुका होता है
यह आम धारणा है कि ऐसा कदम उठाने वाला इंसान फैसला कर चुका होता है और उसे बदला नहीं जा सकता।
तथ्य: मानसिक दर्द से गुजर रहे लोग असल में अपने दुख से राहत पाना चाहते हैं। उनके मन में काफी दुविधा होती है। सही समय पर सही सलाह और मदद मिलने से उनकी जान बचाई जा सकती है।
मिथक 4: बिना किसी चेतावनी के अचानक ऐसा होता है
लोग मानते हैं कि ऐसी घटनाएं बिना किसी पूर्व संकेत या चेतावनी के अचानक हो जाती हैं।
तथ्य: ज्यादातर मामलों में व्यक्ति पहले से कुछ बदलाव दिखाता है। जैसे लगातार उदास रहना, लोगों से दूरी बना लेना, चिड़चिड़ापन या मौत के बारे में बातें करना। इन संकेतों को समझना बेहद जरूरी है।
मिथक 5: केवल मानसिक बीमारी से पीड़ित लोग ही ऐसा करते हैं
अक्सर माना जाता है कि केवल गंभीर मानसिक बीमारी वाले लोग ही ऐसा कदम उठाते हैं।
तथ्य: मानसिक विकार एक बड़ा कारण हो सकता है, लेकिन इसके पीछे कई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, जैविक और पर्यावरणीय कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
मदद के लिए यहां करें संपर्क
किसी भी व्यक्ति की मानसिक परेशानी को छोटा न समझें। उनकी बात सुनें और उन्हें विशेषज्ञ की सलाह लेने के लिए प्रेरित करें। मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।
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