जिले का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलMovie prime

जहाँ मन न मिले वहाँ मोड़ अच्छा: जानिए क्यों हर रिश्ते को जबरदस्ती ढोना बुद्धिमत्ता नहीं है

जीवन में हर रिश्ता हमेशा के लिए नहीं होता। यदि कोई संबंध आपके मन की शांति छीन रहा है, तो बिना कड़वाहट के उससे पीछे हट जाना ही समझदारी है। जानिए आत्मसम्मान और रिश्तों की सीमाओं का असली सच।

 

टूटे रिश्तों का बोझ न ढोएं

आत्मसम्मान की कीमत पर कोई रिश्ता नहीं

रिश्तों में सीमाएं तय करना जरूरी

अजनबी होना शत्रु बनने से बेहतर

हमारे जीवन में हर इंसान लंबे समय तक साथ रहने के लिए नहीं आता। कुछ लोग हमें प्यार सिखाते हैं, कुछ सब्र, तो कुछ यह समझा जाते हैं कि सही समय पर किसी रास्ते से पीछे हट जाना भी जिंदगी जीने का एक तरीका है। अक्सर इंसान की सबसे बड़ी गलती यही होती है कि वह बीते हुए कल की सुंदर यादों के सहारे आज के कड़वे और जहरीले रिश्तों को भी ढोता रहता है।

relationship-advice-dr-vinay-kumar-verma-article

अतीत की यादों में आज को न गंवाएं
रिश्ते हमेशा वर्तमान समय में सांस लेते हैं। अगर आपका आज किसी रिश्ते में नकारात्मकता, ईर्ष्या, कड़वाहट और अविश्वास से भर चुका है, तो सिर्फ पुरानी यादों का सम्मान करने के लिए उसे ढोते रहना सही नहीं है। जब किसी संबंध में सम्मान और सद्भाव खत्म हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि उसका बाहरी ढांचा भले खड़ा हो, लेकिन उसकी आत्मा खत्म हो चुकी है।

रिश्तों में सीमाएं तय करना क्यों जरूरी?
हमारे समाज ने हमें हमेशा सहने, झुकने और अपनों के लिए बातें छोड़ देने की सीख दी है। लेकिन हर बार सहते रहना समस्या का समाधान नहीं होता। जब आप लगातार सहते हैं, तो सामने वाले को लगता है कि आप कभी कुछ नहीं कहेंगे। इससे रिश्ते का संतुलन बिगड़ जाता है और सहने वाला इंसान अंदर से पूरी तरह टूट जाता है।

relationship-advice-dr-vinay-kumar-verma-article

अपराधबोध से बाहर निकलें
अक्सर लोग रिश्ते इसलिए निभाते हैं क्योंकि उनके मन में डर होता है। लोग क्या कहेंगे, इतने पुराने संबंध कैसे टूटेंगे, या फिर कहीं गलती मेरी तो नहीं? लेकिन किसी रिश्ते का इतिहास आपके आज से बड़ा नहीं हो सकता। अगर आज का दिन आपको रोज दुख दे रहा है, तो पुरानी यादों को दिल में रखकर वर्तमान से दूरी बना लेना ही असली आत्म-संरक्षण है।

माफ करने का मतलब वापस जाना नहीं
किसी इंसान से दूरी बनाने का मतलब यह नहीं कि आप उससे नफरत करते हैं। आप किसी को दिल से माफ कर सकते हैं, फिर भी उसके पास वापस जाने से मना कर सकते हैं। यह कोई नफरत नहीं, बल्कि मानसिक परिपक्वता है। क्षमा करने का अर्थ किसी को आपके जीवन में दोबारा आकर नुकसान पहुंचाने की अनुमति देना बिल्कुल नहीं है।

दूसरों की बनाई छवि को बदलने की कोशिश न करें
जब कोई व्यक्ति आपके प्रति मन में नकारात्मक सोच बना लेता है, तो आप कितना भी सही काम कर लें, उसे उसमें कमी ही नजर आएगी। ऐसे लोगों के सामने खुद को बेगुनाह साबित करने में अपनी ऊर्जा बर्बाद न करें। कुछ बातों को समय पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि जिसे गलत समझना है, वह आपकी अच्छाई में भी बुराई ढूंढ ही लेगा।

सच्चे और सीमित रिश्ते ही काफी हैं
जीवन में सौ औपचारिक और दिखावटी रिश्तों से बेहतर हैं कि आपके पास चार-पांच सच्चे लोग हों। जिंदगी एक ट्रेन के सफर की तरह है, जहां हर स्टेशन पर कुछ लोग उतरेंगे और कुछ नए चढ़ेंगे। आप उतरने वाले हर यात्री को जबरदस्ती पकड़कर नहीं बैठा सकते। जो जा रहा है, उसे नफरत के साथ नहीं बल्कि पुरानी अच्छी बातों की कृतज्ञता के साथ जाने दें।

दुश्मन बनने से बेहतर है अजनबी हो जाना
जिस रिश्ते में आपको बार-बार अपनी गरिमा और आत्मसम्मान गिराना पड़े, वहां अपनापन नहीं बचता। अगर कोई संबंध आपकी आत्मा को चोट पहुंचा रहा है, तो उस दूरी को बेरुखी न समझें। कभी-कभी खुद को बचाने के लिए कड़वे रिश्ते को एक सुंदर मोड़ देकर वहीं छोड़ देना चाहिए, क्योंकि किसी से शत्रु बने रहने से कहीं बेहतर है कि आप आपस में अजनबी हो जाएं।

चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*