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हड्डियों के लिए 'सुपरफूड' है तिल: कैल्शियम की कमी होगी दूर, सर्दियों में बनता है हड्डियों का सुरक्षा कवच

कमजोर हड्डियों और जोड़ों के दर्द से परेशान हैं? प्रकृति के पास इसका सटीक इलाज 'तिल' के रूप में मौजूद है। कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर तिल न सिर्फ हड्डियों को फौलाद बनाता है, बल्कि बढ़ती उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाता है।

 
 

कैल्शियम का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत

हड्डियों की मजबूती के लिए वरदान

जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत

आयुष मंत्रालय द्वारा प्रमाणित स्वास्थ्य लाभ

सर्दियों में शरीर के लिए सुरक्षा कवच

 आज के दौर में असंतुलित खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण शरीर धीरे-धीरे बीमारियों का घर बनता जा रहा है। कम उम्र में ही हड्डियों का कमजोर होना, मांसपेशियों में ढीलापन और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं अब आम हो गई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद छोटे-छोटे तिल के बीज इन सभी समस्याओं का रामबाण समाधान हैं? प्रकृति ने तिल को कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे महत्वपूर्ण खनिजों से नवाजा है, जो इसे हड्डियों का 'सुपरफूड' बनाते हैं।

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हड्डियों की मजबूती का 'पावरहाउस'
तिल के बीजों में मौजूद पोषक तत्व हड्डियों की सघनता (Density) को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों को टूटने से बचाता है। मैग्नीशियम और फॉस्फोरस हड्डियों की संरचना को बेहतर करते हैं, जिससे शरीर में लचीलापन बना रहता है। विशेषकर महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ होने वाली ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखलापन) की समस्या को रोकने में तिल का नियमित सेवन अत्यंत प्रभावी है।

जोड़ों के दर्द और सूजन में रामबाण
तिल में शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह अर्थराइटिस या जोड़ों की जकड़न से जूझ रहे लोगों के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। तिल के सेवन से जोड़ों के बीच होने वाली सूजन कम होती है और दर्द में राहत मिलती है। सर्दियों के मौसम में जब रक्त संचार धीमा होने से दर्द बढ़ जाता है, तब तिल का सेवन शरीर को अंदरूनी गर्मी प्रदान करता है और जोड़ों को सुचारू रखता है।

आयुष मंत्रालय की मुहर और सेवन का सही तरीका
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी तिल के औषधीय गुणों की पुष्टि करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ हड्डियों के लिए रोजाना 1 से 2 चम्मच तिल का सेवन पर्याप्त है। इसे लेने के कई आसान तरीके हैं:----

भूनकर: तिल को हल्का भूनकर सीधे खाया जा सकता है।

तिल-गुड़ के लड्डू: सर्दियों में तिल और गुड़ का मेल आयरन और कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत है।

सलाद या सूप: इसे भूनकर सलाद या सूप के ऊपर गार्निशिंग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सावधानी भी है जरूरी
यद्यपि तिल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। तिल में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों को इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए। काले और सफेद, दोनों ही प्रकार के तिल फायदेमंद हैं, हालांकि आयुर्वेद में काले तिल को अधिक गुणकारी माना गया है।

संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तिल जैसे पोषक तत्वों का सही समावेश आपको ताउम्र स्वस्थ और मजबूत हड्डियों का मालिक बनाए रख सकता है।

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