खतरे की घंटी: चंदौली में 93% और वाराणसी में 89% पहुंचा भूजल दोहन, सूख रहे हैं नलकूप
उत्तर प्रदेश की नई भूजल रिपोर्ट ने खतरे की घंटी बजा दी है। चंदौली में 93% और वाराणसी में 89% भूजल दोहन दर्ज किया गया है। रिचार्ज से अधिक पानी निकालने के कारण राज्य के कई शहर अब डार्क जोन की कगार पर हैं।
चंदौली में 93 फीसदी भूजल दोहन से संकट
वाराणसी में 89 प्रतिशत तक पहुंचा जल स्तर
गाजियाबाद 123% दोहन के साथ सबसे ऊपर
सबमर्सिबल पंपों के कारण सूख रहे हैं नलकूप
सोनभद्र 49% दोहन के साथ प्रदेश में सबसे सुरक्षित
उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण की तमाम कोशिशों के बावजूद भूजल दोहन की स्थिति भयावह होती जा रही है। नवीनतम गतिशील भूजल रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के कई जिलों में जमीन से पानी निकालने की दर, उसके रिचार्ज होने की दर से कहीं अधिक है। विशेष रूप से पूर्वांचल के चंदौली में 93% और वाराणसी में 89% भूजल का दोहन हो चुका है, जो भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

पश्चिमी यूपी में हालात सबसे ज्यादा गंभीर
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जल निकासी का स्तर सबसे अधिक चिंताजनक है। गाजियाबाद लगातार दूसरे वर्ष भी प्रदेश में सर्वाधिक जल निकासी वाला जिला बना हुआ है, जहाँ दोहन की दर 123% तक पहुँच गई है। इसी तरह गौतमबुद्धनगर में 105%, आगरा में 111% और शामली में 100% दोहन दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों का सीधा मतलब यह है कि इन जिलों में जितना पानी बारिश या अन्य माध्यमों से जमीन के नीचे वापस जा रहा है, उससे कहीं अधिक पानी मशीनों द्वारा खींचा जा रहा है।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड की स्थिति
पूर्वांचल के जिलों में भी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। चंदौली में जल निकासी 93% तक पहुँच गई है, जबकि वाराणसी में यह आंकड़ा 89% है। वहीं संत कबीरनगर में 96% और महाराजगंज में 88% दोहन दर्ज किया गया है। बुंदेलखंड के हमीरपुर में भी 93% और ललितपुर में 83% दोहन ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, सोनभद्र प्रदेश में संतुलन का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। यहाँ अपनी पथरीली भौगोलिक स्थिति और कम सिंचाई निर्भरता के कारण केवल 49% भूजल दोहन दर्ज किया गया है।
सबमर्सिबल पंप और शहरीकरण का असर
भूगर्भ जल विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट की सबसे बड़ी वजह अनियंत्रित शहरीकरण और हर खेत तक पहुँच चुके सबमर्सिबल पंप हैं। एक सबमर्सिबल पंप औसतन प्रति घंटे 3 से 5 हजार लीटर पानी खींच रहा है। इसी का नतीजा है कि पारंपरिक नलकूप और हैंडपंप अब जवाब देने लगे हैं। अलीगढ़ के अकराबाद ब्लॉक जैसे क्षेत्र, जो पहले सुरक्षित श्रेणी में थे, अब 'अर्ध-संकटग्रस्त' श्रेणी में पहुँच गए हैं, जहाँ 250 फीट की गहराई पर भी पानी मिलना मुश्किल हो रहा है।
जागरूकता ही एकमात्र विकल्प
भूगर्भ जल विभाग के सहायक अभियंता श्यामवीर सिंह के अनुसार, सरकार द्वारा जल पुनर्भरण (Recharge) के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जब तक आम जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक इस संकट को टालना असंभव है। यदि जल दोहन की यही रफ्तार रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहर 'जीरो वाटर' की स्थिति का सामना कर सकते हैं।
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