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चकिया के डोडापुर गांव में मिला एक और कुपोषित बच्चा, सीडीपीओ ने नकारा
जिस पर उपजिलाधिकारी ज्वाला प्रसाद ने मृतक सूरज के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनसे अभिलेख इकट्ठा किए थे। 
 

 चंदौली जिले के चकिया विकासखंड के डोडापुर गांव में बुधवार की दोपहर साढ़े तीन वर्ष के एक और कुपोषित बच्चे रिषभ के मिलने से हड़कंप मच गया था, लेकिन बाल विकास परियोजना विभाग के सीडीपीओ ने बताया कि साढे़ तीन वर्ष के बालक का वजन 10 किलोग्राम है। इससे कम वजन होने पर ही बच्चा कुपोषित की श्रेणी में आता है। इसलिए बच्चा कुपोषण की श्रेणी में वजन के आधार पर भी नहीं आता है। 

 हालांकि मामले की जानकारी होने पर पूर्ति निरीक्षक ममता सिंह ने परिवार को हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया था। वहीं दूसरी ओर पूर्ति निरीक्षक ने पोषण पुनर्वास केंद्र चकिया पहुंचकर 28 अगस्त को कुपोषण से मृत बच्चे सूरज के पिता को दशरथ को पात्र गृहस्थी का सफेद कार्ड सौंपा चुकी हैं।

चकिया तहसील में बीते दिनों महादेवपुर कला गांव में कुपोषित 5 वर्षीय बच्चे सूरज की मौत हो गई थी। वहीं उसके भाई शुभम 2 वर्ष की हालत नाजुक होने पर उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में पता चला कि कुपोषण की मानक में चिहि्नत बच्चों के परिजन सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। जिस पर उपजिलाधिकारी ज्वाला प्रसाद ने मृतक सूरज के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनसे अभिलेख इकट्ठा किए थे। 

अभी यह मामला जांच में चल ही रहा था कि बुधवार की दोपहर डोडापुर गांव निवासी राहुल और चंदा का पुत्र रिषभ भी कुपोषण के मानकों के विपरीत मिला। रिषभ की आयु तीन साल छह महीने है। कुपोषण मानको के अनुसार बच्चे का वजन साढ़े बारह किलो के करीब होना चाहिए। लेकिन परिवार वालों का कहना है कि रिषभ का वजन 10 किलो है। वह बीमारी से ग्रस्त है। 

बृहस्पतिवार को बाल विकास परियोजना अधिकारी राकेश बहादुर, सुपरवाइजर पार्वती देवी, आंगनबाड़ी कार्यकत्री माया देवी, आरपीएसके की टीम में सम्मिलित डॉक्टर एसएन सिंह, डॉक्टर वंदना सिंह गांव में पहुंचे और बच्चे के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में बच्चे के स्वस्थ पाए जाने पर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां डॉक्टरों के पैनल ने उसका परीक्षण कर उसे स्वस्थ घोषित किया।

वहीं सीडीपीओ ने बताया कि साढे़ तीन वर्ष के बालक का वजन 10 किलोग्राम है। इससे कम वजन होने पर ही बच्चा कुपोषित की श्रेणी में आता है। इसलिए बच्चा कुपोषण की श्रेणी में वजन के आधार पर भी नहीं आता है। उन्होंने बच्चे को विटामिन, कीड़ी की दवा, कैल्शियम की गोलियां और टानिक अस्पताल द्वारा दिए जाने की बात बताई ।

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