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सद्गुरु के शरण में जाने से जीवन में मिलती है शांति : कथावाचक जगदीशाचार्य
भगवान के शरण मे जाये बिना किसी को शांति नहीं मिलती। जब तक भगवान के प्रति भाव नहीं होगा, तबतक भक्ति नहीं होती।
 

सुख के लिए सद्गुरु की शरण में जाना पड़ता है।

सद्गुरु की कृपा से भगवान की प्राप्ति होती है।

 चंदौली जिला के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत मनकपड़ा गांव में आयोजित 11 दिवसीय संगीतमय रामकथा के चौथे निशा पर शनिवार को प्रयागराज से पधारें कथावाचक जगदीशाचार्य ने कहा कि जिसके जीवन में अशांति होती है, उसे सुख के लिए सद्गुरु की शरण में जाना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति को सद्गुरु की कृपा से भगवान की प्राप्ति होती है।
 
 उन्होंने कहा कि भगवान के शरण मे जाये बिना किसी को शांति नहीं मिलती। जब तक भगवान के प्रति भाव नहीं होगा, तबतक भक्ति नहीं होती।  भगवान में भाव उत्पन्न होते ही शांति अपने आप आ जाती है। कहा कि राजा दशरथ को चौथे पन में ग्लानि हुई तब वह सद्गुरु वशिष्ठ के पास जाते हैं। सद्गुरु का चरण वंदन करके पुत्र की कामना करते हैं। भगवान ने पहले ही वचन दिया है।  चौथा पन आ गया। मानों भगवान भी प्रतिक्षा कर रहे थे कि अगर महाराज सद्गुरु के पास जाये तो फिर हम अवतार लें।

 जब गुरु के आश्रम में राजा दशरथ गये तो वशिष्ठ सृंगी ऋषि को बुलाकर पुत्र के लिए शुभ यज्ञ कराते हैं। जिसके उपरांत राजा दशरथ के यहां भगवान राम के रुप में प्रकट होते हैं। साथ में भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म होता है। इसीलिए कहा जाता है कि भगवान की प्राप्ति भी सद्गुरु कृपा से ही होती है। राजा दशरथ भगवान के आते ही ब्रह्मनंद में लीन हो गए। सभी अवधवासी आनंदमग्न हो जातें हैं। हर जगह ढोल नगाड़े पर अयोध्या वासी  सोहर गीत पर जमकर थिरके।

इस मौके पर  प्रमोद पाण्डेय,पिण्टू, शशिकांत पाण्डेय,विजय सिह,सटरु सिंह,अशोक दूबे,प्रतिक पाण्डेय, जयशंकर उपाध्याय सहित कई श्रोताओं ने राम कथा का रसपान किया।

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