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वस्त्र संन्यास से प्रेम संन्यास सर्वश्रेष्ठ है : पंडित शिवम शुक्ला
श्रीवत्सर महादेव परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा की चौथी निशा में पंडित शिवम शुक्ला जी महाराज ने रामकथा द्वारा शिव कथा और श्री कृष्ण कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। 
 

श्रीमद् भागवत कथा में डूब रहे भक्त, श्रीवत्सर महादेव परिसर में पंडित शिवम शुक्ला सुना रहे हैं कथा

चंदौली जिले के शहाबगंज इलाके के मसोईं गांव के श्रीवत्सर महादेव परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा की चौथी निशा में पंडित शिवम शुक्ला जी महाराज ने रामकथा द्वारा शिव कथा और श्री कृष्ण कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। 

पंडित शिवम शुक्ला जी महाराज ने कहा कि श्री कृष्ण की लीला में प्रेम माधुर्य से भरी है जबकि राम कि प्रत्येक लीला में मर्यादा है, जो धर्म की मर्यादा में रहता है। उसके मन में ही प्रभु प्रेम जागता है। इसी से भागवत में मर्यादा पुरुषोत्तम की कथा पहले आती है और प्रेम पुरुषोत्तम की कथा बाद में आती है। श्री राम जी त्याग और वैराग्य की प्रतिमूर्ति हैं, जो मोह रूपी रावण का वध करें, अहंकार रूपी कुंभकरण को या तो सुला दे अथवा नष्ट कर दे और माया रूपी मेघनाथ पर विजय प्राप्त करें। उसी का हृदय रामराज्य कहलाता है।

 

पंडित शिवम शुक्ला जी महाराज ने बताया कि श्री कृष्ण प्रेम रस के संबंध में है। श्री कृष्ण मन आकर्षण करके प्रेमरस का दान करते हैं। गोपियों का मन सदैव श्री कृष्णा में आसक्त रहता है। इसी से गोपियों की सहज समाधि और सुखदेव जी स्वयं गोपियों की कथा कह रहे हैं। सुखदेव जी सन्यासी महात्माओं के आचार्य पर गोपियों की प्रशंसा करते हैं। गोपियों का वस्त्र संन्यास नहीं है। गोपियों का प्रेम संन्यास है। वस्त्र सन्यास से प्रेम सन्यास सर्वश्रेष्ठ है। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा पर गोपियों के मन में घर नहीं है। गोपियों के मन में श्री कृष्ण का स्वरूप स्थिर है। गोपियां नाक नहीं पकड़ती, प्राणायाम नहीं करती फिर भी सहज समाधि है। 

श्री कृष्ण लीला में इंद्रियों को सहज समाधि की ओर ले जाकर परमानंद की अनुभूति कराने के लिए ही भगवान नारायण नर रूप में  गोकुल में प्रकट होते हैं। गोपियां बधाई देती हुई गाती हैं... नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की। ब्रजवासी गाते हैं... नंद जी के अंगना में बज रही आज बधाई। श्रोता गण भाव विहोर होकर कथा का आनंद ले रहे थे।