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उत्तर प्रदेश शासन अंग्रेजों जैसा कानून वापस ले, बिना जल कनेक्शनधारियों पर टैक्स थोपना गैरकानूनी

बोर्ड की बैठक के पूर्व एआईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने ज्ञापन देकर कहा था कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करें कि जो जल कनेक्शन नहीं लिए हैं, उनसे जलकर नहीं लिया जाए।
 

अजय राय ने दोहराई अपनी मांग

चकिया नगर पंचायत बोर्ड ने शासन से जलकर वापस करने के लिए मांगा है मार्गदर्शन

जलकर वापस लेने की मांग पूरा होने तक चलता रहेगा आंदोलन

चंदौली जिले की आदर्श नगर पंचायत चकिया के बोर्ड ने बिना कनेक्शन लिए लोगों  से जलकर न लेने के लिए अपनी ओर से पहल की है और विशेष सचिव नगर विकास अनुभाग -9 उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर इस संदर्भ में मार्गदर्शन मांगा है।

 आपको बता दें कि बोर्ड की बैठक के पूर्व एआईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने ज्ञापन देकर कहा था कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करें कि जो जल कनेक्शन नहीं लिए हैं, उनसे जलकर नहीं लिया जाए। तब बोर्ड  की बैठक में  सभासद मीना विश्वकर्मा ने जलकर वापस लेने का प्रस्ताव पेश किया था। इस पर सभी सभासद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर दिया था, लेकिन  सरकारी गजट का हवाला देकर इसे न वसूलने का कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की जा सकी।

Ajay Rai Demand

लेकिन सरकारी गजट का हवाला देकर नगर पंचायत ऐसा नहीं कर पा रही है। सरकारी गजट 15 अप्रैल 2006 के अनुसार गजट के भाग 8 में जल मूल्य व जलकर उपविधि का प्रकाशन हुआ है, जिसमें उपविधि के बिन्दु संख्या 30  में उल्लिखित है कि नगर पंचायत सीमा में जो निवासी जो जल कनेक्शन लिए हैं, उन सभी नागरिकों से जल नल पोस्ट  व नगर में लगे हैण्ड पम्पों से पानी लेना माना जाएगा और उनसे तीस रुपए हर महीने जलकर देना होगा और नहीं देने पर अर्थदंड भी दस प्रतिशत देना होगा।

आपको बता दें कि  चकिया  में यह कर पहले नहीं लगता था, लेकिन ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट ने कर की वसूली शुरू करा दिया था, जो कहीं से न्याय संगत नहीं था। इसलिए शासन स्तर पर वापस लिये जाने की मांग की जा रही है।

 बोर्ड के प्रस्ताव के अनुसार आदर्श नगर पंचायत चकिया अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव ने  शासन को पत्र भेजकर वापस करने के लिए मार्ग दर्शन  देने की मांग की है। एआईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने कहा कि शासन को चाहिए कि देश जब हमारा स्वतंत्र हुआ तो राज्य की कल्याणकारी योजनाएं पर जोर था,  लेकिन यह टैक्स उस कल्याणकारी अवधारणाओं पर भी चोट है। इसलिए वापस लेना चाहिए। बिना सेवा दिए कर लेने की नीति गलत है।

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