"ऊँट के मुँह में जीरा है सरकारी सहायता": अजय राय ने मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड योजना की राशि बढ़ाने की उठाई मांग
मजदूर किसान मंच के नेता अजय राय ने चंदौली में फसल की आगजनी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने वर्तमान मुआवजा राशि को अपर्याप्त बताते हुए मुख्यमंत्री से ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षित अग्निशमन दल तैनात करने की मांग की है।
खेत-खलिहान सहायता योजना की राशि बढ़ाने की मांग
ब्लॉक स्तर पर फायर ब्रिगेड दमकल की व्यवस्था
चकिया के जंगली इलाकों में आधुनिक संसाधनों का अभाव
अधिया और कुट पर खेती करने वाले किसानों पर संकट
अप्रैल से जून तक अग्निशमन दल की विशेष मुस्तैदी की अपील
चंदौली जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में फसल कटाई के सीजन के दौरान हो रही आगजनी की घटनाओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इसी कड़ी में भभौरा के जहानगंज में गेंहू की फसलों के जलने का मुआयना करने पहुँचे मजदूर किसान मंच के राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने उत्तर प्रदेश सरकार की 'मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना' पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
मुआवजा राशि बढ़ाने की पुरजोर मांग
अजय राय ने वर्तमान सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे "ऊँट के मुँह में जीरा" करार दिया। उन्होंने कहा कि एक से दो हेक्टेयर तक फसल क्षति होने पर अधिकतम 30,000/- रुपये की सहायता ऊँट के मुँह में जीरा के समान है, जो वास्तविक नुकसान के मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस राशि को तत्काल बढ़ाया जाए, ताकि उन किसानों को राहत मिल सके जो अधिया, कुट या पेशबंदी पर खेती करते हैं और आगजनी के बाद दाने-दाने को मोहताज हो जाते हैं।
फायर ब्रिगेड सिस्टम की विफलता पर प्रहार
आईपीएफ नेता ने जनपद के फायर ब्रिगेड सिस्टम की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि अप्रैल से जून के बीच लू और गर्मी के कारण आगजनी का खतरा सर्वाधिक रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अक्सर फसल पूरी तरह जल जाने के बाद दमकल की गाड़ियाँ पहुँचती हैं, क्योंकि संसाधनों और मुस्तैदी का घोर अभाव है। खासकर चकिया जैसे जंगली और दुर्गम इलाकों में न तो आधुनिक अग्निशमन यंत्र हैं और न ही आपदा प्रबंधन में दक्ष कर्मचारी।
ब्लॉक स्तर पर तैनात हों प्रशिक्षित दस्ते
मजदूर किसान मंच की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर यह मांग की जाएगी कि हर ब्लॉक स्तर पर कम से कम एक आधुनिक दमकल गाड़ी की स्थायी व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, अप्रैल से जून के संवेदनशील महीनों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
अजय राय ने कहा कि बिजली के शॉर्ट सर्किट, अज्ञात कारणों या मानवीय लापरवाही से होने वाली ये घटनाएं किसानों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन गई हैं। सरकार को केवल कागजी योजनाएं चलाने के बजाय धरातल पर संसाधनों को मजबूत करना होगा ताकि अन्नदाता की साल भर की मेहनत को राख होने से बचाया जा सके।
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