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मई दिवस पर AIPF नेता अजय राय घर में नजरबंद, मजदूर किसान मंच ने पुलिस कार्रवाई को बताया असंवैधानिक

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर चकिया में एआईपीएफ नेता अजय राय को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने से आक्रोश है। मजदूर किसान मंच ने इसे असंवैधानिक बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया है।

 
 

एआईपीएफ नेता अजय राय को चकिया में पुलिस ने किया नजरबंद

मई दिवस मनाना मजदूरों का संवैधानिक अधिकार: अजय राय

मजदूर किसान मंच ने नेताओं की नजरबंदी की कड़ी निंदा की

स्वास्थ्य कारणों और हार्ट पेसमेकर के बावजूद की गई कार्रवाई

श्रम कानूनों में बदलाव और ठेका प्रथा के खिलाफ उठाई आवाज

चंदौली जिले के चकिया में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (एआईपीएफ) के राष्ट्रीय फ्रंट कमेटी सदस्य अजय राय को पुलिस प्रशासन द्वारा उनके ही घर में नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर मजदूर किसान मंच और श्रमिक संगठनों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। मजदूर किसान मंच ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए कहा कि सरकार मजदूरों और उनके नेताओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

स्वास्थ्य कारणों के बावजूद पुलिस ने दिखाई सख्ती
घटनाक्रम के अनुसार, एआईपीएफ नेता अजय राय गांधी पार्क में दवा लेने के लिए निकले थे। उनके स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर है, क्योंकि उन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है और शरीर में पेसमेकर लगा है। पुलिस ने उन्हें शुरुआत में हिरासत में ले लिया था, लेकिन दवा लेने की जरूरत को देखते हुए एसएचओ ने मानवीय आधार पर उन्हें घर जाने की अनुमति दी और बाद में उनके घर पर ही उन्हें नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई के बावजूद अजय राय ने मजदूरों की वर्तमान स्थिति और उनके अधिकारों पर गंभीर चिंता जताई।

मजदूरों की बदहाली और शोषण पर उठाए गंभीर सवाल
नजरबंदी के दौरान जारी अपने बयान में अजय राय ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मजदूर आज भी भीषण शोषण, बेरोजगारी और सामाजिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की नीतियां पूरी तरह मजदूर विरोधी हैं, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति बदतर हो गई है। उन्होंने ठेका प्रथा और संविदा पर दी जाने वाली नौकरियों की आलोचना की और कहा कि सरकारी रोजगार के केंद्र बंद कर मजदूरों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान
अजय राय ने मांग की कि सभी मजदूरों को पंजीकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं, बीमा और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन को आधुनिक गुलामी के खिलाफ एक बड़ा प्रतिवाद बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मई दिवस पर पुलिस द्वारा जुलूस रोकने और नेताओं को नजरबंद करने की कार्रवाई को मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। अंत में उन्होंने सभी श्रमिकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

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