किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण अन्यायपूर्ण : अजय राय
धरौली के किसानों की लहलहाती फसलों पर चलाया बुलडोजर
बिना उचित मुआवजा के फसल को रौंदना गलत
किसानों के हित में भूमि अधिग्रहण कानून होना जरूरी
चंदौली जिले के किसानों की उपजाऊ जमीन और रिहायशी मकानों का विकास के नाम पर अधिग्रहण करना किसानों के साथ अन्याय है। यह कहना है एआईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय का। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार हुई लहलहाती फसलों को उजाड़कर और बिना उचित मुआवजा दिए भूमि का अधिग्रहण करना न केवल किसानों की आजीविका पर चोट है बल्कि कानून की भी अवहेलना है।
अजय राय ने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने किसानों के हित में भूमि अधिग्रहण कानून बनाया था। इस कानून के तहत स्पष्ट प्रावधान था कि उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण तभी होगा जब बहुत आवश्यक हो। साथ ही अधिग्रहण की स्थिति में बाजार दर का चार गुना मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने 2015 में इस कानून में संशोधन कर किसानों के अधिकारों को कमजोर कर दिया।

धरौली, कठोरी और बरहुली सहित कई गांवों के किसानों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए उनकी जमीन और मकान अधिग्रहित किए जा रहे हैं, जबकि उन्हें न तो उचित मुआवजा दिया गया और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई। किसानों का कहना है कि जब अधिग्रहण होना ही था तो फसल बोने से पहले सूचना दी जाती, ताकि उनकी मेहनत और धन बर्बाद न होता। आज उनकी धान की लहलहाती फसलें उजाड़ दी जा रही हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि चंदौली जनपद में वर्षों से सर्किल रेट नहीं बढ़ा था, जिसे इस साल बढ़ाया गया है। इसके बावजूद मुआवजा पुराने रेट के आधार पर दिया जा रहा है। रेवसा गांव के लोग लंबे समय से मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।
जानकारी के अनुसार यह अधिग्रहण भारत माला परियोजना के तहत हो रहा है, जिसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, औद्योगिक विकास निगम और राज्यों के लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत देशभर के 550 जिलों को कम से कम चार लेन वाले हाईवे से जोड़ा जाएगा और 50 कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसकी अनुमानित लागत पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
अजय राय ने कहा कि सरकार किसानों और आम लोगों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने मांग की कि अधिग्रहित जमीन के लिए उचित मुआवजा दिया जाए, रिहायशी मकानों में रहने वाले परिवारों को पुनर्वास की व्यवस्था मिले और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को लागू किया जाए। साथ ही धरौली के किसानों की लहलहाती फसलों को बिना मुआवजा दिए बर्बाद करना पूरी तरह गलत है।
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