छत और प्लास्टर के बाद भी 6 महीने से लटक रहा बरहुआ महाविद्यालय का निर्माण कार्य, जानिए क्या है वजह
चकिया के बरहुआ स्थित संस्कृत महाविद्यालय में एमएलसी निधि से बन रहा कक्ष दूसरी किस्त के अभाव में 6 महीने से अधूरा है। प्रथम किस्त के ₹6 लाख से छत और प्लास्टर का काम पूरा होने के बाद भी शेष बजट जारी नहीं किया गया।
एमएलसी निधि का काम अधूरा पड़ा
छह महीने से दूसरी किस्त अटकी
आईजीआरएस पर शिकायत भी बेअसर
भवन की एक दीवार अभी बाकी
छात्र नए कक्ष से रहे वंचित
चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बरहुआ स्थित मृत्युंजय पांडेय संस्कृत महाविद्यालय में विकास कार्यों को लेकर प्रशासनिक उदासीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) आशुतोष सिन्हा ने अपनी विधायक निधि से महाविद्यालय परिसर में नए कक्ष के निर्माण के लिए कुल 10 लाख रुपये की लागत की स्वीकृति प्रदान की थी। इसके तहत प्रथम किस्त के रूप में विभाग को ₹6 लाख की धनराशि प्राप्त हुई थी।
छत और प्लास्टर का काम पूरा, फिर भी लटका बजट
कार्यदायी संस्था द्वारा प्रथम किस्त की प्राप्त धनराशि का सदुपयोग करते हुए भवन की मजबूती से छत डलवा दी गई है, खिड़कियां भी लगा दी गई हैं तथा प्लास्टर का समस्त कार्य पूरी तरह से संपन्न करा लिया गया है। इस काम को पूर्ण हुए करीब 6 महीने का लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद, निर्माण कार्य की दूसरी और अंतिम किस्त जारी न होने के कारण अब पूरा का पूरा प्रोजेक्ट अचानक अधर में लटक गया है।
आईजीआरएस पर शिकायत के बाद भी नहीं मिली रकम
महाविद्यालय प्रबंधन का साफ कहना है कि दूसरी किस्त प्राप्त न होने के कारण नए भवन की एक तरफ की दीवार का निर्माण कार्य अभी भी पूरी तरह से रुका हुआ है। निर्माण कार्य वैसे तो अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन शेष भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदार द्वारा इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। धनराशि जारी कराने के लिए कई बार संबंधित विभाग को मांग पत्र भेजा गया और मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई।
प्रशासनिक संवेदनशीलता पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के निस्तारण में विभागीय अधिकारियों ने खुद मौके की रिपोर्ट लगाई है कि भवन की छत पड़ चुकी है, खिड़कियां लग चुकी हैं और प्लास्टर का कार्य पूरा हो चुका है। सब कुछ सही पाए जाने के बाद भी आखिर किस वजह से दूसरी किस्त की फाइल रोकी गई है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। महाविद्यालय प्रबंधन ने जिला प्रशासन से शीघ्र दूसरी किस्त जारी कर निर्माण पूरा कराने की पुरजोर मांग की है, ताकि छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
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