आटा चक्की चलाकर घर का खर्त चलाती हैं बरहुआं की आरती, बिना सरकारी मदद के बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
चंदौली के बरहुआं गांव की आरती देवी आटा चक्की चलाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। बिना किसी सरकारी मदद के ससुर के सहयोग से चक्की शुरू कर वे परिवार का खर्चा चला रही हैं और बच्चों को पढ़ा रही हैं।
बरहुआं गांव की आरती बनीं मिसाल
आटा चक्की चलाकर संभाली परिवार की जिम्मेदारी
बिना सरकारी सहायता के खुद का रोजगार
ससुर के सहयोग से पाई बड़ी सफलता
बच्चों की पढ़ाई और घर में सहयोग
हौसले और पक्के इरादों के बल पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नया मुकाम हासिल कर सकती हैं। चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत बरहुआं गांव की रहने वाली आरती देवी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। आरती देवी अपने गांव में खुद आटा चक्की चलाकर न सिर्फ अपने परिवार का पेट पाल रही हैं, बल्कि बच्चों की बेहतर पढ़ाई का जिम्मा भी उठा रही हैं। उनकी यह लगन और आत्मनिर्भरता गांव की बाकी महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है।

शुरुआत में था संकोच, फिर मेहनत से पाई सफलता
आरती देवी बताती हैं कि जब उन्होंने आटा चक्की चलाने का फैसला किया, तो शुरुआत में उनके मन में थोड़ा संकोच और डर जरूर था। उन्हें लग रहा था कि एक औरत होकर क्या वह इस तरह का भारी काम सफलतापूर्वक कर पाएंगी या नहीं। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत ने इस झिझक को पूरी तरह खत्म कर दिया। आज वह रोजाना बिना किसी हिचकिचाहट के आटा चक्की चलाती हैं और इससे होने वाली कमाई से घर-परिवार चलाने में मदद करती हैं।
बिना सरकारी मदद के अपने दम पर शुरू किया काम
आरती देवी का कहना है कि उन्होंने यह काम किसी सरकारी योजना या मदद के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से शुरू किया है। चक्की से जो भी आमदनी होती है, उससे घर की रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकालने में भी बड़ी मदद मिलती है। इस काम ने आरती देवी के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया है और परिवार का आर्थिक ढांचा भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया है।
ससुर राजेंद्र मौर्य बने सबसे बड़ी ताकत
आरती देवी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने ससुर राजेंद्र मौर्य को देती हैं। उनका कहना है कि आटा चक्की का यह काम शुरू कराने में उनके ससुर का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने हर मुश्किल मोड़ पर आरती का हौसला बढ़ाया और कदम-कदम पर उनका साथ दिया। ससुर के इसी प्रोत्साहन की बदौलत आज आरती अपने पैरों पर खड़ी होकर पूरे परिवार का सहारा बन पाई हैं।
गांव की बाकी महिलाओं के लिए दिया खास संदेश
आरती देवी की यह कहानी गांव के माहौल में रहने वाली उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है, जो किसी न किसी वजह से अपने पैरों पर खड़े होने से कतराती हैं। उनका मानना है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा और मेहनत करने की आदत हो, तो कोई भी महिला घर की चारदीवारी की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपना खुद का छोटा-मोटा रोजगार आसानी से खड़ा कर सकती है।
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