साढ़े 5 करोड़ की आदर्श नहर परियोजना में भारी लापरवाही, किसान नेताओं ने खोल दी पोल
चन्दौली में साढ़े 5 करोड़ रुपये से बन रही बेन धरौली आदर्श नहर का सच जानने जब किसान नेता जमीन पर उतरे, तो काम में कई बड़ी कमियां और भारी सुस्ती देखने को मिली। जानिए क्या है पूरा मामला।
बेन धरौली नहर निर्माण में भारी कमियां आईं सामने
शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन के काम की रफ्तार बेहद धीमी
दो साल से कछुआ गति से चल रहा है कार्य
झाड़ियों और पेड़ों से फसल हो रही है बर्बाद
कुलावे न बढ़ने पर दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
चंदौली जिले में सरकारी धन के इस्तेमाल और अफसरों की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ बेन धरौली नहर को करीब साढ़े 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 'आदर्श नहर' के रूप में विकसित किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते इस महत्वपूर्ण परियोजना में कई तरह की बड़ी खामियां और गड़बड़ियां देखने को मिल रही हैं।
इस बीच, सिंचाई विभाग के भरोसे न बैठकर किसान विकास मंच ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया है। मंच के पदाधिकारियों ने किसानों को साथ लेकर पूरी नहर का औचक निरीक्षण किया, जिसके बाद विभागीय दावों की पोल खुलकर सामने आ गई है।

शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन के काम की रफ्तार बेहद सुस्त
किसानों के हक की आवाज उठाने वाले किसान विकास मंच के संगठन मंत्री ने खखड़ा, बटौवा खिलची, जंगलपुर, समदा पुल और बेन तियरी तक के इलाकों का सघन दौरा किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नहर निर्माण का जिम्मा संभाल रही 'शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन' कंपनी के कार्य की गति बेहद कछुआ रफ्तार से चल रही है। पिछले दो सालों से केवल गर्मियों के मौसम में थोड़ा-बहुत काम खींचा जाता है और पिछले साल नवंबर में भी कुछ नाममात्र का काम कराया गया था, जिसके चलते आज भी बहुत सारा काम अधूरा पड़ा हुआ है।
नियम के मुताबिक, आदर्श नहर की प्रमुख शर्त यह है कि नहर की पूर्वी पटरी का ऊपरी हिस्सा यानी 'टॉप' कम से कम 2 मीटर चौड़ा बनाना जरूरी है, जो कि अभी तक नहीं बन पाया है। खिलची, खेतयी पुर और समदा पुल के पास पूर्वी पटरी पर भारी मात्रा में झाड़ियां और पेड़ उगे हुए हैं, जो राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
पेड़ों और झाड़ियों से फसल हो रही बर्बाद
संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने इस बड़ी समस्या से अधिशासी अभियंता हरेंद्र कुमार, सहायक अभियंता और अवर अभियंता को तुरंत अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि इन पेड़ों की घनी छाया के कारण किसानों के खेत हमेशा गीले रह जाते हैं, जिससे धान की हार्वेस्टिंग (कटाई) के समय मशीनों को चलाने में भारी दिक्कत आती है। इसके अलावा, धान की रोपाई और चना, मसूर व मटर की कटाई के समय इसकी पतली और नुकीली लकड़ियां मजदूरों के हाथों में गड़ जाती हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन पेड़ों को किसानों ने नहीं लगाया है, लेकिन वे वन विभाग के डर के कारण इन्हें खुद काट भी नहीं पा रहे हैं। जब तक सिंचाई विभाग इन पेड़ों और झाड़ियों को साफ नहीं कराएगा, तब तक पटरी का 2 मीटर चौड़ा टॉप बनना नामुमकिन है। इसके कारण पूर्वी पटरी पर पैदल चलना तो दूर, बाइक या ट्रैक्टर ले जाना भी असंभव हो गया है।
कुलावे बढ़ाने और बाढ़ जलजमाव से मुक्ति की उठी मांग
निरीक्षण के दौरान किसानों की सिंचाई से जुड़ी कई अन्य जरूरतें भी सामने आईं। किसानों ने मांग की है कि सिंचाई को बेहतर करने के लिए खखड़ा इलाके में छह इंच के कुलावों की संख्या को तुरंत बढ़ाया जाए। इसी तरह, बटौवा फाल पर एक कुलावा (छह इंच का) और जंगलपुर फाल के पास पूर्वी पटरी में भुड़कुड़ा इलाके की भरपूर सिंचाई के लिए दो अतिरिक्त छह इंच के कुलावे लगाए जाने की बेहद जरूरत है।
इसके साथ ही, किसान विकास मंच ने सिंचाई विभाग को चेताया है कि बटौवा से लेकर खखड़ा तक का पूरा सिवान बरसात के दिनों में बाढ़ के पानी से डूब जाता है। फसल को तबाही से बचाने के लिए यहाँ बाढ़ निकासी के कुलावों को समय रहते चुस्त-दुरुस्त और पूरी तरह कारगर करना होगा, तभी किसान सुरक्षित खेती कर पाएंगे।
निवारण नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारी फिलहाल तो किसानों की इन सभी जायज समस्याओं को ध्यान से सुन रहे हैं और उनके जल्द निवारण के लिए आश्वस्त कर रहे हैं। लेकिन, अगर तय समय के भीतर इन जमीनी समस्याओं का पक्का हल नहीं निकाला गया, तो किसान विकास मंच चुप नहीं बैठेगा और प्रशासन के खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगा।
नहर के इस महत्वपूर्ण निरीक्षण दौरे में संगठन मंत्री राम अवध सिंह के साथ प्रदीप कुमार सिंह, शुभम् सिंह, रामसरन प्रसाद और अमित कुमार सहित कई मुख्य किसान नेता और ग्रामीण प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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