भटरौल गांव में बिना स्ट्रीट लाइट लगाए डकार गए लाखों रुपये, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
चंदौली के भटरौल गांव में ग्राम प्रधान पर बिना लाइट लगाए साढ़े तीन लाख रुपये निकालने और घटिया सीसी रोड निर्माण का गंभीर आरोप लगा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर धांधली की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
भटरौल गांव में स्ट्रीट लाइट घोटाला
फर्जी बिलों से ₹3.50 लाख का भुगतान
सीसी रोड में घटिया सामग्री का उपयोग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से की लिखित शिकायत
सरकारी धन की बंदरबांट पर जांच की मांग
चंदौली जिले के विकास खंड शहाबगंज के भटरौल गांव में ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और जिम्मेदारों ने बिना कार्य कराए ही सरकारी खजाने से लाखों रुपये का वारा-न्यारा कर दिया है। इस भ्रष्टाचार के खिलाफ शुक्रवार को लामबंद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जांच की गुहार लगाई।
बिना लाइट लगाए निकाल लिए साढ़े तीन लाख
गांव निवासी सुबास, मुरारी, कलावती, बेबी, और संतोष सहित अन्य ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि ग्राम प्रधान द्वारा गांव में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर करीब 3.5 लाख रुपये का फर्जी भुगतान करा लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में लाइट लगाने का कार्य पूर्ण दिखाकर सरकारी धन निकाल लिया गया, जबकि हकीकत यह है कि पूरे गांव में कहीं भी नई स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई है। फर्जी बिलों के सहारे हुए इस खेल से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
सीसी रोड निर्माण में मानकों की अनदेखी
भ्रष्टाचार का यह खेल सिर्फ लाइटों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों ने गांव में बन रही सीसी रोड के निर्माण पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सड़क निर्माण में मानक के अनुरूप ईंट और बालू का प्रयोग करने के बजाय दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री और भस्सी का इस्तेमाल किया गया है। घटिया निर्माण के कारण सड़क बनने के साथ ही टूटने की कगार पर है। ग्रामीणों के अनुसार, कमीशनखोरी के चक्कर में सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर गुणवत्ता से खिलवाड़ किया गया है।
जांच और रिकवरी की उठी मांग
जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्रक में ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए ताकि फर्जीवाड़े की पोल खुल सके। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषी प्रधान और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई और सरकारी धन की वसूली नहीं की गई, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। फिलहाल, अब सबकी नजरें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
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