चकिया तहसील का अजब फैसला: 22 साल पहले मर चुके व्यक्ति के खिलाफ SDM कोर्ट ने सुनाया आदेश, मुर्दे पर मुकदमे से मचा हड़कंप
चंदौली के चकिया में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एसडीएम कोर्ट ने वर्ष 2004 में स्वर्गवासी हो चुके लक्ष्मण प्रसाद के खिलाफ 2026 में फैसला सुना दिया। वारिसों को बिना सुने आए इस आदेश ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक लक्ष्मण प्रसाद के खिलाफ फैसला
22 साल पहले हुई थी मौत
वारिसों को नहीं दिया गया मौका
मुंसिफ कोर्ट की डिग्री दरकिनार
49 दिनों तक दबा रहा आदेश।
चंदौली जिले की चकिया तहसील से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी न्यायिक और प्रशासनिक प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ उपजिलाधिकारी (एसडीएम) न्यायालय ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ फैसला सुनाया है, जिसका निधन दो दशक से भी पहले हो चुका था। वर्ष 2004 में दिवंगत हुए लक्ष्मण प्रसाद के विरुद्ध मार्च 2026 में आए इस आदेश ने तहसील परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला शहाबगंज विकास खंड के बेन गांव स्थित एक विशाल तालाब और भीटा की जमीन से जुड़ा है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार, यह संपत्ति फसली वर्ष 1309 (आजादी पूर्व) से लेकर 1435 तक लगातार लक्ष्मण प्रसाद और उनके पूर्वजों के नाम दर्ज रही है। परिजनों का दावा है कि उनके पास वर्ष 1983 में मुंसिफ मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई एकपक्षीय डिग्री और वर्ष 2021 में कमिश्नर न्यायालय से उनके पक्ष में आए आदेश मौजूद हैं।
मृत्यु के 13 साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा
हैरानी की बात यह है कि लक्ष्मण प्रसाद का निधन 12 अक्टूबर 2004 को ही हो गया था। इसके बावजूद, विपक्षी महेंद्र और अन्य लोगों ने तथ्यों को छिपाकर वर्ष 2017 में लक्ष्मण प्रसाद को प्रतिवादी बनाते हुए चकिया एसडीएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया। परिजनों का आरोप है कि एसडीएम कोर्ट ने 12 फरवरी 2026 की सुनवाई के दौरान मृतक के वारिसों का पक्ष सुने बिना ही कार्रवाई जारी रखी।
नियमों की अनदेखी और देरी से आया आदेश
परिजनों ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से लेकर जिला स्थायी समिति की बैठक तक में की थी। आरोप है कि नियमों के मुताबिक 15 दिनों के भीतर निर्णय आना चाहिए था, लेकिन इस आदेश को 49 दिनों तक रोके रखा गया। अंततः 30 मार्च को जारी आदेश में मृतक लक्ष्मण प्रसाद के विरुद्ध फैसला सुना दिया गया।
इस प्रकरण ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि क्या डिजिटल युग में भी राजस्व न्यायालयों में जीवित और मृत व्यक्तियों का सत्यापन नहीं किया जा रहा है? फिलहाल पीड़ित परिवार इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय जाने और उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*







