Asha Workers Protest: आर-पार के मूड में आशा संगिनी, लखनऊ आंदोलन के लिए चकिया में सौंपा ज्ञापन
अपनी लंबित समस्याओं और मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश की आशा व आशा संगिनी कार्यकर्ता 30 सितंबर 2026 से लखनऊ में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगी। इसी सिलसिले में मंगलवार को ऑल इंडिया आशा संगिनी समिति ने चकिया पीएचसी पर पत्र सौंपकर अनुमति मांगी।
चकिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सौंपा ज्ञापन
30 सितंबर से लखनऊ में धरना प्रदर्शन
आल इंडिया आशा संगिनी समिति की तैयारी
शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए मांगी सुरक्षा व्यवस्था
लंबे समय से लंबित मांगों पर प्रदर्शन
चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र से स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अपनी विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर प्रदेश भर की आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। कार्यकर्ताओं ने 30 सितंबर 2026 से राजधानी लखनऊ में अनिश्चितकालीन व शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इसी आंदोलन की कड़ी में मंगलवार को ऑल इंडिया आशा एवं आशा संगिनी कर्मचारी सेवा समिति के पदाधिकारियों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चकिया पर पहुंचकर अधिकारियों को एक पत्र सौंपा। इस पत्र के माध्यम से संगठन ने लखनऊ में होने वाले प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के संबंध में जानकारी दी और अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया।
लखनऊ आंदोलन में जुटेंगी प्रदेश भर की कार्यकर्ता
संगठन की ओर से सौंपे गए आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 30 सितंबर से शुरू होने वाले इस विशाल प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भारी संख्या में आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ता राजधानी लखनऊ पहुंचेंगी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अपनी मूलभूत समस्याओं और मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना चाहती हैं।
सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग की मांग
संगठन के पदाधिकारियों ने पत्र के जरिए स्थानीय और प्रांतीय प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति जल्द प्रदान की जाए। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल और यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
ऑल इंडिया आशा एवं आशा संगिनी कर्मचारी सेवा समिति के सदस्यों ने आश्वासन दिया है कि सभी कार्यकर्ता पूरी तरह से अनुशासित रहकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगी। आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।
लंबे समय से अनदेखी से बढ़ा रोष
आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्य रीढ़ हैं। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी समस्याओं, मानदेय और कार्य स्थिति को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल सका है।
बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी मांगें पूरी न होने पर अब कार्यकर्ताओं का धैर्य जवाब दे चुका है। यही वजह है कि अब राज्य स्तर पर एक बड़े धरना-प्रदर्शन के जरिए अपनी बात सीधे शासन तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
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