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चकिया विधानसभा में सोनकर परिवार फिर से सक्रिय, अखिलेश से एक और मौका मांग रहीं पूनम सोनकर

चकिया विधानसभा में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तीन बार विधायक दे चुका सोनकर परिवार समाजवादी पार्टी के टिकट के लिए एक बार फिर से अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहा है।

 
 

चकिया विधानसभा में गहराया चुनावी माहौल

पूनम सोनकर की सपा से दावेदारी

स्व. सत्य प्रकाश सोनकर की विरासत

चकिया में सोनकर परिवार का प्रभाव

समाजवादी पार्टी टिकट दावेदारी की चर्चा

चंदौली जिले की चकिया विधानसभा सीट पर भले ही चुनाव में अभी कुछ समय बाकी हो, लेकिन इलाके में सियासी बिसात बिछने लगी है। गांव की चौपालों से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठकों तक संभावित उम्मीदवारों के नामों की चर्चाएं बेहद तेज हो चुकी हैं। इस चुनावी सरगर्मी के बीच समाजवादी पार्टी के सबसे पुराने और भरोसेमंद परिवारों में गिना जाने वाला सोनकर परिवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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तीन बार विधानसभा का कर चुके हैं प्रतिनिधित्व
चकिया की राजनीति में सोनकर परिवार का इतिहास काफी मजबूत रहा है। स्व. सत्य प्रकाश सोनकर ने छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की थी और बाद में चकिया को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने वर्ष 1989 और 1996 में विधायक चुनकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। उनके निधन के बाद वर्ष 2012 में उनकी पत्नी पूनम सोनकर भी सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। इस तरह यह परिवार तीन बार चकिया का प्रतिनिधित्व कर चुका है।

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2022 में कटा था टिकट, अब फिर आस
वर्ष 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में पूनम सोनकर का टिकट कट गया था। हालांकि, इसके बावजूद सोनकर परिवार इलाके में लगातार सक्रिय बना रहा। अब एक बार फिर पूनम सोनकर पार्टी नेतृत्व से अपने लिए मौका मांगने की तैयारी में हैं। वे स्व. सत्य प्रकाश सोनकर के अधूरे सपनों और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटी हुई हैं।

मजबूत जनसंपर्क और सामाजिक पकड़
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चकिया की राजनीति में केवल पार्टी संगठन ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार का व्यक्तिगत जनसंपर्क भी काफी मायने रखता है। लंबे समय से जनता के बीच रहने के कारण सोनकर परिवार की सामाजिक स्वीकार्यता आज भी बरकरार है। स्व. सत्य प्रकाश सोनकर की जनता पर पकड़ का फायदा आज भी परिवार को मिलता दिख रहा है।

नई पीढ़ी भी क्षेत्र में लगातार सक्रिय
परिवार की नई पीढ़ी के सदस्य अमित सोनकर और अश्वनी सोनकर भी लगातार क्षेत्र में पसीना बहा रहे हैं। सामाजिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और पार्टी के सम्मेलनों में उनकी मौजूदगी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा रही है। स्थानीय कार्यकर्ता भी उनके इस जमीनी जुड़ाव को देखते हुए उनके नाम को प्रमुख दावेदारों में गिन रहे हैं।

सपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर पार्टी पुराने जनाधार, संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता देती है, तो सोनकर परिवार सबसे आगे रहेगा। हालांकि, सुरक्षित सीट होने के नाते स्थानीय समीकरण, सामाजिक संतुलन और जीत की संभावना जैसे कई पहलू टिकट तय करने में अहम होंगे। अंतिम फैसला सपा के शीर्ष नेतृत्व को ही लेना है।

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