चकिया में ऑपरेशन के बाद नवजात की वाराणसी में मौत, लापरवाही की शिकायत पर सीज हुआ बद्रीनाथ अस्पताल
चंदौली के चकिया में नवजात की मौत के मामले में बद्रीनाथ अस्पताल को सीज कर दिया गया है। तहसील दिवस में शिकायत के बाद डिप्टी सीएमओ ने निरीक्षण कर कार्रवाई की। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और पैसे वसूलने का आरोप लगाया था।
चकिया में बद्रीनाथ अस्पताल सीज किया गया
नवजात की वाराणसी में इलाज के दौरान मौत
डिप्टी सीएमओ संजय यादव ने की कार्रवाई
परिजनों ने लगाया लापरवाही और वसूली का आरोप
तहसील दिवस में डीएम से की थी शिकायत
चंदौली जिले के चकिया स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय के समीप संचालित बद्रीनाथ अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। ऑपरेशन के बाद जन्मे नवजात की वाराणसी में उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में अस्पताल को सीज कर दिया गया है।
तहसील दिवस में जिलाधिकारी से की गई शिकायत के करीब पखवारेभर बाद डिप्टी सीएमओ संजय यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को अस्पताल का निरीक्षण किया। जांच में खामियां मिलने के बाद अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला
बबुरी थाना क्षेत्र के भदौलीया गांव निवासी अर्जुन अपनी पत्नी किरण देवी को प्रसव के लिए बद्रीनाथ अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार अस्पताल में किरण देवी का ऑपरेशन किया गया।
ऑपरेशन के बाद जन्मे नवजात की हालत गंभीर हो गई। हालत बिगड़ने पर पहले नवजात को चकिया स्थित बाबा कीनाराम अस्पताल में ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही समेत कई गंभीर आरोप लगाए। उनका आरोप था कि नवजात की गंभीर हालत की उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों का कहना है कि प्रसव के बाद नवजात को देखने तक नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, उपचार के नाम पर उनसे लाखों रुपये वसूल लिए गए। गरीब परिवार से होने के बावजूद उनसे भारी-भरकम फीस ली गई, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।
डीएम से लगाई थी न्याय की गुहार
मामले को लेकर परिजनों ने तहसील दिवस में जिलाधिकारी से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों ने कहा था कि अस्पताल संचालक की लापरवाही से उनके बच्चे की जान गई है।
शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। शनिवार को डिप्टी सीएमओ संजय यादव के नेतृत्व में टीम अस्पताल पहुंची।
निरीक्षण में मिलीं खामियां
टीम ने अस्पताल में संचालित चिकित्सा व्यवस्था और जरूरी कागजातों की जांच की। सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई खामियां मिलीं। जिसके बाद अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि चकिया में कई निजी अस्पताल बिना मानक के चल रहे हैं।
आगे भी होगी कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के संबंध में अभी जांच की जा रही है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर लापरवाही साबित हुई तो अस्पताल संचालक और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी निजी अस्पताल में इलाज कराने से पहले उसके पंजीकरण और डॉक्टर की योग्यता की जांच जरूर कर लें।
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