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महिला दिवस विशेष: चंदौली की महिलाओं ने साझा किए अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर चंदौली की महिलाओं ने शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। आटा चक्की चलाने वाली आरती देवी से लेकर शिक्षिकाओं तक ने समाज में बदलाव का संकल्प लिया।

 

चंदौली की महिलाओं का महिला दिवस

शिक्षा से आएगा सामाजिक बदलाव

आत्मनिर्भरता की अनूठी प्रेरणादायक कहानी

संघर्ष से सफलता की नई राह

महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और साहस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र में महिलाओं ने एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान महिलाओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए इस बात पर एकमत राय रखी कि शिक्षा ही समाज में बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम है। सैदूपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका उषा सिंह ने कहा कि बेटियों को शिक्षित करना न केवल एक कर्तव्य है, बल्कि एक बेहतर समाज की नींव रखना है।

संघर्ष से सफलता तक की दास्तान
इस आयोजन में बरहुआ ग्राम सभा की आरती देवी की कहानी सबसे अधिक प्रेरणादायक रही। आरती देवी ने बताया कि वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आटा चक्की चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनका सपना है कि उनकी बेटियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। वर्तमान में उनकी एक बेटी एमए फाइनल में है, जबकि दूसरी बीए कर रही है। उनका संघर्ष साबित करता है कि इच्छाशक्ति के आगे कोई भी बाधा छोटी होती है।

बदलाव की बयार और महिला नेतृत्व
समाजसेविका सीमा कुमारी और सोनम पांडेय ने कहा कि आज महिलाएं केवल घरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रशासन से लेकर समाज सेवा तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। शिक्षिका सुषमा केशरी ने जोर देते हुए कहा कि पढ़ाई के माध्यम से ही महिलाएं अपने सपनों को पंख दे सकती हैं। वक्ताओं ने सभी महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

एक नया संदेश
महिला दिवस के इस कार्यक्रम ने चंदौली की महिलाओं को एक नया मंच दिया। यहाँ की महिलाओं ने यह संदेश दिया कि वे आत्मनिर्भरता की राह पर निरंतर अग्रसर हैं। शिक्षा, जागरूकता और आपसी सहयोग के माध्यम से चकिया की महिलाएं समाज में एक सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन की ओर बढ़ रही हैं, जो जिले के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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