चकिया में माकपा का हल्ला बोल: ₹1000 न्यूनतम मजदूरी और लेबर कोड रद्द करने की मांग, तहसील पर प्रदर्शन।
ग्रेटर नोएडा के श्रमिकों के समर्थन में चकिया में माकपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बंद श्रमिकों की रिहाई, फर्जी मुकदमे वापसी और न्यूनतम मजदूरी ₹1000 करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को संबोधित मांग पत्र प्रशासन को सौंपा गया।
चकिया नगर में माकपा का विशाल जुलूस
बंद श्रमिकों को तत्काल रिहा करने की मांग
चारों लेबर कोड रद्द करने पर अड़ी पार्टी
₹1000 न्यूनतम दैनिक मजदूरी की पुरजोर मांग
हाउस अरेस्ट की कार्रवाई की कड़ी निंदा
चंदौली जिले के चकिया में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को श्रमिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए चकिया नगर पंचायत में जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रेटर नोएडा में श्रमिकों के खिलाफ हुई कार्रवाई के विरोध में कार्यकर्ताओं ने नगर में जुलूस निकाला और अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रपति को संबोधित एक मांग पत्र तहसील प्रशासन को सौंपा गया।
श्रमिकों की रिहाई और मुकदमे वापसी की मांग
जुलूस का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने ग्रेटर नोएडा के 300 से अधिक श्रमिकों को जेल भेजे जाने की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया। माकपा ने मांग की कि जेल में बंद श्रमिकों को तत्काल रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए रासूका (NSA) व अन्य कथित फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों की आवाज को दमन के जरिए दबाने की कोशिश करना लोकतंत्र के लिए खतरा है।
लेबर कोड और न्यूनतम मजदूरी पर तीखा प्रहार
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चारों लेबर कोड को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि ये कानून मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और इससे पूंजीपतियों को लाभ होगा। इसके साथ ही, बढ़ती महंगाई को देखते हुए श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी कम से कम 1000 रुपये निर्धारित करने की मांग पर जोर दिया गया। सीआईटीयू नेता रामप्यारे महानंद ने नेताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
संघर्ष जारी रखने का संकल्प
सभा को संबोधित करते हुए परमानंद मौर्य और लालचंद सिंह (एडवोकेट) ने कहा कि माकपा हर कदम पर श्रमिकों और किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो आने वाले समय में एक बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। कार्यकर्ताओं ने आम जनता से भी सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
जुलूस और सभा में मुख्य रूप से राजेंद्र यादव, नंदलाल, रामविलास विश्वकर्मा, शत्रुघ्न चौहान, बड़े लाल, काशी बिंद, जुम्मन, धर्मराज साहनी और कन्हैया लाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल रहे।
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