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चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय में उपेक्षा की भेंट चढ़ा हर्बल गार्डन, औषधीय पौधों की जगह उगी झाड़ियां

चंदौली के चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय परिसर में बना औषधीय गुणों वाला हर्बल गार्डन अस्पताल प्रशासन की घोर उदासीनता के कारण बदहाल है। पौधों की सिंचाई और निराई न होने से पूरा परिसर घास-फूस से जकड़ चुका है।

 
 

10 वर्ष पूर्व स्थापित हुआ था हर्बल गार्डन

अस्पताल प्रशासन की उदासीनता से बढ़ा संकट

परिसर में जीव-जंतुओं ने बनाया अपना डेरा

रोपे गए थे कई कीमती औषधीय पौधे

सीएमएस डॉ. आरबी सिंह ने दिया आश्वासन

चंदौली जिले के चकिया नगर स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय परिसर में स्थापित हर्बल गार्डन की उपयोगिता अब पूरी तरह सार्थक सिद्ध नहीं हो पा रही है। अस्पताल प्रशासन की घोर उदासीनता के चलते औषधीय युक्त पौधों से हरा-भरा रहने वाला यह परिसर आज जंगली घास-फूस और कटीली झाड़ियों से पूरी तरह जकड़ गया है। रखरखाव न होने के कारण अब इस सुरक्षित स्थान पर जहरीले जीव-जंतुओं ने अपना परमानेंट डेरा जमा लिया है, जिससे संक्रमण और खतरे की आशंका बढ़ गई है।

10 वर्ष पूर्व इस खास मकसद के साथ हुई थी स्थापना
इस हर्बल गार्डन को स्थापित करने का मुख्य मकसद यह था कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बुखार, खांसी, जुकाम समेत अन्य मौसमी बीमारियों से निजात पाने के लिए यहीं से आसानी से औषधीय पौधे मिल सकें। इसके साथ ही इस हरित पट्टी से अस्पताल के पर्यावरण को भी काफी बल मिलता था। इस गार्डन में मेडिसिन गुणों से भरपूर तुलसी, एलोवेरा, दालचीनी, इलायची, मेंहदी, अशोक, हींग, गिलोय और कड़ी पत्ता समेत कई महत्वपूर्ण पौधे रोपित किए गए थे।

माली की नियुक्ति के बाद भी सिंचाई और निराई ठप
लगभग 10 वर्ष पूर्व स्थापित इस महत्वपूर्ण गार्डन के प्रति चिकित्सालय प्रशासन का रवैया लगातार गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है। हालांकि, कागजों पर इस गार्डन की सही ढंग से देखरेख करने के लिए एक विशेष माली की नियुक्ति भी की गई है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ लगे पौधों की समय पर सिंचाई और निराई-गुड़ाई नियमित रूप से बिल्कुल नहीं की जाती है। यही वजह है कि लाखों की लागत से तैयार यह गार्डन आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

सीएमएस ने दिया आश्वासन, नए सिरे से तैयार होगा खाका
इस पूरे मामले पर गंभीरता दिखाते हुए जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि गार्डन को नए सिरे से पुनर्विकसित करने की एक विस्तृत योजना बनाई गई है। इसके चारों तरफ रंग-बिरंगे खुशबू वाले पौधे और नए औषधीय युक्त पौधों को लगाने का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि गार्डन की देखरेख करने वाले कर्मचारियों को जिम्मेदारी से काम करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

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