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बोदारा कला माइनर की कटान ने बढ़ाई मुसीबत, कड़ाके की ठंड में जलभराव के बीच खाद लेने को मजबूर किसान

चंदौली के चकिया में बोदारा कला माइनर का तटबंध टूटने से कृभको गोदाम परिसर टापू बन गया। भीषण ठंड में घुटने भर पानी में खड़े होकर किसान खाद लेने को विवश हैं, जबकि गोदाम में रखे स्टॉक पर भी खतरा मंडरा रहा है।

 
 

बोदारा कला माइनर का तटबंध टूटा

कृभको गोदाम परिसर हुआ जलमग्न

ठंड में पानी के बीच किसान बेहाल

यूरिया खाद के स्टॉक को खतरा

चंदौली जिले के चकिया पूर्वी बाजार स्थित क्रय विक्रय सहकारी समिति परिसर में बुधवार को अराजक स्थिति देखने को मिली। यहां स्थित कृषक सेवा भारती केंद्र (कृभको) का पूरा परिसर झील में तब्दील हो गया है। दरअसल, मंगलवार को लालपुर राइट पथरहवा बोदारा कला माइनर का तटबंध कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके चलते माइनर का तेज पानी सीधे कृभको गोदाम परिसर में जा घुसा। इस जलभराव के कारण कड़ाके की ठंड के बीच दूर-दराज से आए किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसान घुटने भर पानी में खड़े होकर खाद लेने को मजबूर दिखे।

क्षतिग्रस्त माइनर में पानी छोड़ने से बिगड़े हालात

ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि बोदारा कला माइनर लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर स्थिति में थी। माइनर के कई हिस्से पहले से ही कटान की जद में थे, इसके बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बिना सुरक्षा जांच किए इसमें तेज गति से पानी छोड़ दिया। पानी का दबाव बढ़ते ही तटबंध कई जगहों से टूट गया और देखते ही देखते पानी आसपास के क्षेत्रों के साथ सरकारी गोदाम परिसर में भर गया। इस लापरवाही ने न केवल किसानों के लिए मुसीबत खड़ी की, बल्कि सरकारी खाद के स्टॉक पर भी संकट पैदा कर दिया है।

खाद सुरक्षित लेकिन वितरण प्रक्रिया हुई प्रभावित

परिसर में अचानक पानी भरने से कृभको के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। गोदाम में रखे लाखों रुपये के उर्वरक के नष्ट होने की आशंका से स्टाफ चिंतित दिखा। हालांकि, राहत की बात यह रही कि गोदाम का मुख्य फर्श ऊंचाई पर बना होने के कारण पानी बोरियों तक नहीं पहुंच सका। कृभको प्रभारी रमेश चंद्र शुक्ला ने बताया कि फिलहाल यूरिया का स्टॉक सुरक्षित है और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन परिसर में जलभराव होने से वितरण का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

ठंड में पानी के बीच संघर्ष करते अन्नदाता

इस भीषण शीतलहर के मौसम में किसानों को खाद के लिए पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। किसान अपनी खाद की बोरियों को रिक्शा, ई-रिक्शा, ठेला और यहां तक कि अपने सिर पर लादकर पानी के बीच से बाहर निकालते नजर आए। किसानों का कहना है कि खाद लेना उनकी मजबूरी है, इसलिए वे इस कष्टदायक स्थिति में भी काम कर रहे हैं। कृभको प्रभारी ने बताया कि जलभराव की समस्या और माइनर के टूटने की सूचना संबंधित विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है ताकि जल्द से जल्द जल निकासी का प्रबंध किया जा सके।

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