चकिया में मिलावटी शराब का खेल: देसी ठेके पर केमिकल और पानी मिलाने का आरोप, ग्रामीणों ने किया हंगामा
चंदौली के चकिया स्थित हरिपुर बड़ेपार देसी शराब ठेके पर मिलावटखोरी का बड़ा आरोप लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि यहाँ केमिकल और पानी मिलाकर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है, साथ ही नियमों को ताक पर रखकर सुबह और बंदी के समय भी अवैध बिक्री जारी है।
देसी शराब में केमिकल मिलावट का गंभीर आरोप
गैस जलाकर मिलावट करने से हादसे का डर
बंदी के समय भी खुलेआम शराब की अवैध बिक्री
सेल्समैन और स्थानीय बिचौलियों की मिलीभगत
ग्रामीणों ने की प्रशासन से लाइसेंस निरस्त करने की मांग
चंदौली जनपद के चकिया विकास खंड अंतर्गत ग्राम हरिपुर बड़ेपार स्थित देसी शराब की दुकान इन दिनों मिलावटखोरी के आरोपों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय ग्रामीणों ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बताया कि ठेके के भीतर अवैध रूप से शराब की शीशियों को खोलकर उनमें केमिकल और पानी का मिश्रण तैयार किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मिलावट की इस प्रक्रिया के दौरान बगल में ही गैस जलाई जाती है, जिससे आरक्षित क्षेत्र में कभी भी भीषण आग या विस्फोट जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
नियमों की उड़ रही धज्जियां, बिचौलियों का बोलबाला
ग्रामीणों के अनुसार, इस शराब ठेके की अनुज्ञापी (मालिक) बंदना यादव हैं, जबकि दुकान का संचालन सेल्समैन शिवरतन विश्वकर्मा और मनोज गुप्ता द्वारा किया जा रहा है। आरोप है कि आबकारी विभाग के नियमों को ताक पर रखकर यहाँ निर्धारित समय के बाद और बंदी के दिनों में भी शटर के नीचे से शराब बेची जाती है। इतना ही नहीं, ठेका संचालक सामने रहने वाले एक व्यक्ति 'छोटू गोड' के माध्यम से भी अवैध रूप से शराब की खेप खपा रहे हैं, जिससे गांव का माहौल खराब हो रहा है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा
ग्रामीणों का आरोप है कि मिलावटी शराब पीने से क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। केमिकल युक्त शराब के सेवन से किसी भी दिन बड़ी जनहानि हो सकती है। विरोध करने वाले लोगों का आरोप है कि ठेके पर काम करने वाले लोग दबंगई के बल पर विरोध को दबाने की कोशिश करते हैं। सुबह के वक्त जब बच्चे स्कूल जाते हैं, उस समय भी नशेड़ियों और अवैध खरीदारों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे महिलाओं और बच्चों का निकलना दूभर हो गया है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर हरिपुर बड़ेपार और आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से ठेके पर छापेमारी की जाए और शराब के सैंपल भरकर जांच के लिए भेजे जाएं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई और लाइसेंस निरस्त नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'मौत के कारोबार' पर कब नकेल कसता है।
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