चकिया में बाबा साहब अंबेडकर की 135वीं जयंती की धूम: मुड़हुआ से मुरारपुर तक निकलेगी भव्य शोभायात्रा
चंदौली के चकिया में 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती भव्य रूप में मनाई जाएगी। डॉ. भीमराव अंबेडकर सेवा समिति के नेतृत्व में विशाल शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक समानता का संदेश दिया जाएगा।
मुड़हुआ रविदास मंदिर से भव्य शोभायात्रा
14 अप्रैल को मनेगी 135वीं जयंती
पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राव का नेतृत्व
झांकियों के माध्यम से बाबा साहब को नमन
चकिया विकासखंड के गांवों में भारी उत्साह।
भारतीय संविधान के शिल्पी डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए चंदौली जिले के चकिया विकासखंड में उत्साह का माहौल है। 14 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह के लिए 'डॉ. भीमराव अंबेडकर सेवा समिति' ने अपनी कमर कस ली है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में समानता व भाईचारे का संदेश देना है।
मुड़हुआ से मुरारपुर तक सजेगी भव्य शोभायात्रा
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, जयंती समारोह की शुरुआत 14 अप्रैल की सुबह 10 बजे मुड़हुआ स्थित रविदास मंदिर प्रांगण से होगी। यहाँ से एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो मुरारपुर अमरा दक्षिणी तक जाएगी। इस शोभायात्रा में बाबा साहब के जीवन संघर्षों और उनके ऐतिहासिक योगदानों को जीवंत करती हुई आकर्षक झांकियां, पोस्टर और बैनर शामिल होंगे। युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस यात्रा को और भी प्रभावशाली बनाएगी।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राव के नेतृत्व में समीक्षा बैठक
समारोह की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राव लगातार बैठकों के जरिए तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। हाल ही में रविदास मंदिर परिसर में हुई एक अहम बैठक में शोभायात्रा के मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और स्वागत स्थलों पर विस्तृत चर्चा की गई। महेंद्र राव ने कहा कि यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम है।
सामाजिक एकता का दिखेगा संगम
इस वर्ष समिति ने आयोजन को और अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया है। चकिया के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग इस उत्सव में शामिल होंगे। आयोजन को लेकर बाजारों और चौराहों पर अभी से हलचल देखी जा रही है। कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि अनुशासन के साथ कार्यक्रम संपन्न हो सके। समिति के सदस्यों का संकल्प है कि बाबा साहब की 135वीं जयंती के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ा जाए, जिससे एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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