भीषमपुर कादिरगंज में भीषण आग का तांडव: झोपड़ी जलने से गरीब परिवार बेघर, लाखों का नुकसान
चंदौली के भीषमपुर कादिरगंज गांव में शनिवार देर रात लगी भीषण आग में मनोज मौर्य की झोपड़ी जलकर राख हो गई। इस हादसे में करीब 2.50 लाख रुपये का सामान जल गया और पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।
देर रात आग से झोपड़ी खाक
लाखों रुपये का भारी नुकसान हुआ
पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे
ग्रामीणों ने की तत्काल मदद की मांग
भाजपा नेता ने दिया मदद का भरोसा
चंदौली जिला अंतर्गत चकिया तहसील के भीषमपुर कादिरगंज गांव में शनिवार देर रात करीब 11 बजे अचानक भीषण आग लग गई। इस आगजनी में मनोज मौर्य की झोपड़ी पूरी तरह जलकर राख हो गई। रात के सन्नाटे में जब लपटें उठीं, तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते उसने पूरी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। परिवार के पास अपनी आंखों के सामने सब कुछ जलता देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
ग्रामीणों के प्रयास रहे विफल
आग की लपटें देखकर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बाल्टी, हैंडपंप व अन्य उपलब्ध संसाधनों की मदद से आग बुझाने की कोशिश करने लगे। लेकिन लपटें इतनी विकराल थीं कि ग्रामीणों के सारे प्रयास विफल साबित हुए। कुछ ही देर में झोपड़ी में रखा पूरा सामान जलकर नष्ट हो गया। इस हादसे में अनाज, कपड़े, बर्तन, नकदी, जरूरी कागजात और सोने-चांदी के आभूषण जलकर खाक हो गए। पीड़ित मनोज मौर्य के अनुसार, इस अग्निकांड में लगभग 2.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पीड़ित से मिले भाजपा जिला उपाध्यक्ष
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। इसी क्रम में भाजपा जिला उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप मौर्य भी घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिलकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित मनोज मौर्य को ढांढस बंधाया और प्रशासन से हरसंभव सरकारी सहायता दिलाने का पूरा भरोसा दिया।
प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार
इस भीषण अग्निकांड के बाद मनोज मौर्य का परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। उनके सामने अब खाने-पीने और रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस विपत्ति की घड़ी में पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री और आर्थिक मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही पीड़ित को प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य किसी सरकारी योजना के तहत नया पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए ताकि वे दोबारा अपना जीवन सामान्य कर सकें।
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