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चकिया के सावित्रीबाई फुले पीजी कॉलेज में भ्रष्टाचार के आरोप, डेढ़ माह बाद भी शिकायत पर प्रशासन मौन।

चकिया के सावित्रीबाई फुले महाविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर किए डेढ़ माह बीत चुके हैं। अब तक कोई जवाब न मिलने से छात्र और अभिभावक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

 
 

आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई शून्य

आरओ सिस्टम और वाटर कूलर में भ्रष्टाचार का आरोप

लाइब्रेरी बंद होने से छात्र महंगी किताबें खरीदने को मजबूर

यूजीसी अनुदान के दुरुपयोग और प्रभारी प्राचार्य पर सवाल

खंडहर में तब्दील कॉलेज आवास की बदहाली आई सामने

चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश की पारदर्शी जनसुनवाई प्रणाली पर चकिया इलाके में लालफीताशाही हावी होती दिख रही है। चकिया स्थित सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत डेढ़ माह बाद भी समाधान की राह देख रही है। 14 दिसंबर 2025 को दर्ज इस शिकायत (संख्या: 40019625020632) पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।

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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा इंफ्रास्ट्रक्चर
शिकायतकर्ता का आरोप है कि महाविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से लगाए गए आरओ सिस्टम और वाटर कूलर केवल कागजों और दिखावे तक सीमित हैं। यह पूरा सिस्टम कथित तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। इसके अतिरिक्त, महाविद्यालय की लाइब्रेरी की स्थिति भी चिंताजनक है। आरोप है कि पुस्तकालय नियमित रूप से नहीं खोला जाता, जिसके कारण दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले निर्धन छात्र बाजार से महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हैं।

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सरकारी अनुदान के दुरुपयोग का आरोप
महाविद्यालय की देखरेख और रंग-रोगन के नाम पर यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से मिलने वाले भारी-भरकम बजट के उपयोग पर भी उंगली उठाई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि परिसर में स्थित आवास खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और रखरखाव के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। प्रभारी प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर काफी असंतोष व्याप्त है। आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण महाविद्यालय का शैक्षणिक माहौल और ढांचागत व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग
महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ इस जनशिकायत को दरकिनार किए जाने से छात्रों और अभिभावकों में रोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि जब मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का यह हाल है, तो सामान्य सूचना के अधिकार का क्या होगा? फिलहाल, क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी चंदौली से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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