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चकिया में दर्दनाक हादसा: काली मंदिर के पुजारी की डंफर की टक्कर से मौत, ग्रामीणों का सड़क जाम

चंदौली के चकिया में मिट्टी लदे ओवरलोड डंफर ने काली मंदिर के पुजारी वीरेंद्र झा को कुचल दिया। इस हादसे ने एक ऐसे परिवार का अंत कर दिया जिसने पहले ही अपने दो बेटों और मां को खो दिया था।

 

ओवरलोड डंफर की टक्कर से पुजारी की मौत

चकिया-मुगलसराय मार्ग पर ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन

नक्सली हमले में शहीद जवान के पिता थे वीरेंद्र

भटौली गांव के पास हुआ दर्दनाक सड़क हादसा

विधायक और एसडीएम के आश्वासन पर खुला जाम

चंदौली जनपद के चकिया कोतवाली क्षेत्र में सोमवार सुबह एक हृदयविदारक घटना घटी। बबुरी थाना क्षेत्र के विठवल कलां गांव के समीप सुबह करीब 7 बजे, मिट्टी से लदे एक तेज रफ्तार और ओवरलोड डंफर ने साइकिल सवार पुजारी वीरेंद्र झा (70 वर्ष) को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि काली मंदिर के पुजारी वीरेंद्र झा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वह चकिया से अपने पैतृक गांव भटौली लौट रहे थे।

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आक्रोशित ग्रामीणों का सड़क पर प्रदर्शन
हादसे के बाद चालक डंफर लेकर भागने की फिराक में था, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर चकिया-मुगलसराय मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर गाड़ियों का लंबा काफिला लग गया। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में प्रशासन की नाक के नीचे अवैध और ओवरलोड वाहनों का संचालन हो रहा है, जो आए दिन मासूमों की जान ले रहे हैं।

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अधिकारियों ने कराया जाम शांत
तनावपूर्ण स्थिति की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य, उपजिलाधिकारी (SDM) विनय कुमार मिश्रा और पुलिस क्षेत्राधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों को सुना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का भरोसा दिया। जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा।

शहीद के पिता थे वीरेंद्र झा: एक दुखांत अंत
वीरेंद्र झा की मौत महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार का अंत है। उनके बड़े पुत्र पीएसी में तैनात थे, जो 2004 में नौगढ़ के हिनौतघाट में नक्सलियों द्वारा किए गए लैंडमाइन विस्फोट में शहीद हो गए थे। दूसरे पुत्र की भी कानपुर में एक सड़क हादसे में जान चली गई थी। हाल ही में पत्नी के निधन के बाद वीरेंद्र झा बिल्कुल अकेले रह गए थे। आज उनकी मृत्यु के साथ ही उस वीर शहीद का घर पूरी तरह सूना हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

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