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शहाबगंज के रज्जुपुर में आग का तांडव, दो बीघा गेहूं की फसल जलकर खाक, किसानों के अरमान राख

शहाबगंज के रज्जुपुर गांव में अज्ञात कारणों से लगी आग ने दो किसानों की तैयार गेहूं की फसल को स्वाहा कर दिया। तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे साल भर की मेहनत चंद पलों में राख हो गई।

 
 

रज्जुपुर गांव में भीषण अग्निकांड

दो बीघा गेहूं की फसल जलकर नष्ट

राममूरत और अमीउल्ला को भारी नुकसान

ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से बुझाई आग

राजस्व विभाग ने शुरू किया क्षति का आकलन

चंदौली जिले के शहाबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत रज्जुपुर गांव में मंगलवार की दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब खेतों में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। अज्ञात कारणों से लगी यह आग देखते ही देखते विकराल हो गई। चिलचिलाती धूप और तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया, जिससे लपटों ने पास के खेतों में खड़ी गेहूं की तैयार फसल को अपनी चपेट में ले लिया।

किसानों पर टूटा आर्थिक दुखों का पहाड़
इस अग्निकांड में रज्जुपुर के दो प्रमुख किसानों को भारी क्षति हुई है। किसान राममूरत विश्वकर्मा की लगभग 5 बिस्वा और अमीउल्ला की करीब डेढ़ बीघा गेहूं की खड़ी फसल पूरी तरह जलकर राख हो गई। पीड़ित किसानों का कहना है कि फसल पूरी तरह पककर तैयार थी और कटाई की तैयारी चल रही थी, लेकिन कुदरत के इस कहर ने उनकी साल भर की मेहनत और निवेश को मिट्टी में मिला दिया।

ग्रामीणों की मुस्तैदी ने बचाया पूरा इलाका
आग की भयावहता को देखते हुए गांव के सैकड़ों लोग बाल्टी, पानी और मिट्टी लेकर मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी जान जोखिम में डालकर आग को चारों तरफ से घेर लिया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, जिससे पास के अन्य खेतों में खड़ी फसल को जलने से बचा लिया गया। यदि समय रहते ग्रामीण सक्रिय न होते, तो नुकसान का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था।

प्रशासन से मुआवजे की उठी पुरजोर मांग
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेखपाल और अन्य राजस्व कर्मियों ने जले हुए खेतों का निरीक्षण कर नुकसान का प्रारंभिक आकलन शुरू कर दिया है। प्रभावित किसानों ने रुंधे गले से सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द सर्वे पूरा कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि उनकी जीविका का एकमात्र सहारा यही फसल थी, जिसके नष्ट होने से अब परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।

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