मसोई गांव में गूंजा मानवता का संदेश, अतुल कृष्ण भारद्वाज की संगीतमय रामकथा में मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु
चंदौली के मसोई गांव में मानस सेवा समिति द्वारा आयोजित संगीतमय रामकथा में कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने मानवता और सेवा का संदेश दिया। उन्होंने श्रीराम के जीवन के माध्यम से समाज में समानता का पाठ पढ़ाया।
मसोई में संगीतमय रामकथा का आयोजन
अतुल कृष्ण भारद्वाज का प्रेरक प्रवचन
दीन-दुखियों की सेवा ही सच्ची भक्ति
समाज में समानता का संदेश
मानस सेवा समिति की अनूठी पहल
चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत मसोई गांव में इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण बना हुआ है। मानस सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित संगीतमय रामकथा ने न केवल श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि समाज को मानवता और सेवा का एक बड़ा संदेश भी दिया है। कथा के दौरान पूरा क्षेत्र राममय हो गया है।
मानवता और दीन-दुखियों की सेवा ही असली भक्ति
कथा व्यास पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को बेहद भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने प्रवचन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि ईश्वर की सच्ची भक्ति केवल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि दीन-दुखियों, वनवासियों और समाज के वंचित वर्ग की सेवा में निहित है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने आस-पास के जरूरतमंदों की सहायता करते हैं, तो वही ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है। व्यास जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने के लिए संगठित होकर प्रयास करने का आह्वान किया।
धनुष भंग और मर्यादित पुरुषोत्तम का प्रसंग
कथा के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और श्रीराम-सीता विवाह के प्रसंगों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास ने बताया कि जब महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम जनकपुरी पहुंचे, तो शिव धनुष को तोड़कर उन्होंने अहंकार का अंत और धर्म की स्थापना का मार्ग दिखाया। वहीं, परशुराम और लक्ष्मण के बीच के संवाद ने उपस्थित लोगों को रोमांच से भर दिया। अंत में परशुराम जी द्वारा श्रीराम की दिव्यता को स्वीकार करना यह दर्शाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा लोक कल्याण के लिए होना चाहिए।
सामाजिक समरसता का संकल्प
कथा के अंतिम पड़ाव पर राजा दशरथ और जनकपुरी के भव्य स्वागत का वर्णन सुनकर श्रद्धालु नृत्य और कीर्तन में झूम उठे। पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने अंत में सभी से आग्रह किया कि वे हनुमान जी के आदर्शों को अपनाएं। उन्होंने समाज से ऊँच-नीच, छुआछूत और भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर एक समतामूलक समाज बनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता का मार्ग प्रशस्त करे। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लिया और कथा के संदेश को आत्मसात करने का प्रयास किया।
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