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BRC में शिक्षा गुणवत्ता पर मंथन: सेवानिवृत्त शिक्षकों का हुआ भव्य सम्मान, अनुभव साझा कर दी नई दिशा

शहाबगंज ब्लॉक संसाधन केंद्र पर आयोजित शिक्षोन्नयन संगोष्ठी में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान तीन सेवानिवृत्त शिक्षकों और ब्लॉक एकेडमिक कोऑर्डिनेटर को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


 
 

बीआरसी शहाबगंज में शिक्षोन्नयन संगोष्ठी

तीन सेवानिवृत्त शिक्षकों का भव्य सम्मान

शिक्षण गुणवत्ता और नवाचार पर मंथन

बीईओ अजय कुमार ने सराहा योगदान

शिक्षकों को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र भेंट

चंदौली जिले में ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) शहाबगंज के प्रांगण में मंगलवार को 'शिक्षोन्नयन संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह' का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल विदाई की बेला रहा, बल्कि शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए एक वैचारिक मंच भी बना। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) अजय कुमार ने माँ सरस्वती के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया।

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उत्कृष्ट सेवाओं के लिए शिक्षकों का सम्मान
समारोह के दौरान तीन सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके लंबे और बेदाग सेवाकाल के लिए भावभीनी विदाई दी गई। सम्मानित होने वालों में कम्पोजिट विद्यालय घोड़सारी के राम प्रसाद पाण्डेय, कम्पोजिट विद्यालय भोड़सर के गुलाब शर्मा और कम्पोजिट विद्यालय बडौरा के नेसार अहमद सिद्दीकी शामिल रहे। इसके साथ ही, ब्लॉक एकेडमिक कोऑर्डिनेटर देवव्रत सिंह को भी उनके विशिष्ट शैक्षिक योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित अतिथियों को अंगवस्त्र, धार्मिक पुस्तकें एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

शिक्षक समाज के निर्माण की आधारशिला: बीईओ
खण्ड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार ने अपने संबोधन में शिक्षकों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि वह समाज के निर्माण की आधारशिला रखता है। एक शिक्षक के समर्पण से ही बच्चों का भविष्य संवरता है।" उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों के अनुभवों को नई पीढ़ी के लिए अनमोल बताते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन भविष्य में भी शिक्षकों को प्रेरित करता रहेगा।

शिक्षा गुणवत्ता और चुनौतियों पर चर्चा
संगोष्ठी के मुख्य सत्र में शिक्षण गुणवत्ता में सुधार, नवाचार और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित शिक्षकों ने अपने शिक्षण अनुभवों को साझा किया और वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों व उनके व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक शिक्षण पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।


इस अवसर पर आनंद पाण्डेय, भुपेंद्र यादव, केशरी नंदन जायसवाल, समद अली, विजई सोनकर, संतोष पाण्डेय, अजय सिंह सपना, अच्युतानंद त्रिपाठी, वरुणेन्द्र पाठक, सत्येन्द्र सिंह, मनोज तिवारी, कन्हैया लाल गुप्ता, विजय श्याम, विमला देवी, उषा सिंह, मुसाफिर सिंह चंचल सहित भारी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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