सैदूपुर में राम कथा की धूम: आचार्या पूर्णिमा ने सजीव वर्णन से भक्तों को किया भक्ति रस में सराबोर
चंदौली के सैदूपुर में चल रही राम कथा के आठवें दिन आचार्या पूर्णिमा जी ने भरत मिलाप और सीता हरण के प्रसंग सुनाए। जटायु प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
सैदूपुर में श्री राम कथा आयोजन
भरत मिलाप प्रसंग से श्रद्धालु भावुक
आचार्या पूर्णिमा का सजीव कथा वर्णन
जटायु प्रसंग ने जीता सबका मन
श्रीराम और सीता के त्याग की गाथा
सैदूपुर में राम कथा का आठवां दिन, सुनाए गए भरत मिलाप और सीता हरण के मार्मिक प्रसंग, रामकथा सुन श्रद्धालु हुए भावुक
चंदौली जिले की चकिया तहसील के सैदूपुर कस्बे में भक्ति का माहौल चरम पर है। राइस मिल प्रांगण में श्री राम सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को कथा का क्रम अत्यंत भावुक और रोमांचक प्रसंगों के साथ आगे बढ़ा। कथा वाचिका आचार्या बाल विदुषी पूर्णिमा जी ने भरत मिलाप, सूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु प्रसंग का सजीव वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
भरत मिलाप का मार्मिक प्रसंग
आचार्या ने कथा के माध्यम से बताया कि भरत जी तीनों माताओं के साथ चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। साधु वेश में राम और सीता को देखकर माताएं व्यथित हो उठती हैं। इस दौरान जब भगवान राम को पिता राजा दशरथ के निधन का समाचार मिलता है, तो पूरा वातावरण अत्यंत करुणामय हो जाता है। भरत जी बार-बार श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजगद्दी संभालने का निवेदन करते हैं, लेकिन श्रीराम पिता के वचन को सर्वोपरि बताते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय दोहराते हैं। अंततः भरत जी प्रभु के खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं तपस्वी जीवन जीते हुए राज्य का संचालन करते हैं।
सीता हरण और जटायु की वीरता
कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्या ने सूर्पणखा प्रसंग का वर्णन किया और बताया कि कैसे उसके अनुचित व्यवहार के बाद रावण ने मारीच के साथ मिलकर छल रचा। माता सीता के आग्रह पर श्रीराम स्वर्ण मृग के पीछे गए और इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण ने सीता का हरण कर लिया। आकाश मार्ग से लंका ले जाते समय जटायु ने वीरता दिखाते हुए सीता की रक्षा का प्रयास किया, लेकिन रावण के प्रहार से वे घायल हो गए। बाद में भगवान राम ने जटायु को अपनी गोद में स्थान देकर मोक्ष प्रदान किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति, करुणा और उत्साह से गूंजता रहा।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान मनोहर केशरी, शीला देवी, अजय गुप्ता, मधुसूदन सेठ, पुष्पा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में आरती के साथ कथा का समापन हुआ।
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