एक महीने से प्यासी है सुल्तानपुर की बस्ती, अधिकारियों की बेरुखी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।
शहाबगंज के सुल्तानपुर गांव में पिछले एक माह से आधा दर्जन सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं। कड़ाके की ठंड में पानी के लिए भटक रहे ग्रामीणों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी की है।
सुल्तानपुर गांव में जल संकट गहराया
एक महीने से खराब आधा दर्जन हैंडपंप
उच्चाधिकारियों की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सुल्तानपुर गांव में गुरुवार को जन-आक्रोश का नजारा देखने को मिला। गांव की बस्ती में लगे सरकारी हैंडपंपों के लंबे समय से खराब होने के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। इस कड़ाके की ठंड में जहां लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है, वहीं इस गांव के निवासियों को दैनिक कार्यों और पीने के पानी के लिए मीलों दूर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने खराब हैंडपंपों के पास एकत्रित होकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए और जमकर नारेबाजी की।
एक महीने से खराब हैं आधा दर्जन सरकारी हैंडपंप
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की इस घनी बस्ती में जल आपूर्ति का मुख्य सहारा सरकारी हैंडपंप ही हैं। पिछले एक महीने के भीतर एक-एक कर आधा दर्जन हैंडपंप पूरी तरह जवाब दे गए हैं। आलम यह है कि पूरी बस्ती में पानी की किल्लत पैदा हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर एडीओ पंचायत से लेकर जिले के उच्चाधिकारियों तक कई बार लिखित और मौखिक शिकायत दर्ज कराई है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से मरम्मत के नाम पर अब तक एक कदम भी नहीं उठाया गया है।
अधिकारियों की बेरुखी और ग्रामीणों की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि अधिकारियों की उदासीनता उनके दैनिक जीवन को नारकीय बना रही है। समाजसेवी रुद्र नारायण त्रिपाठी और जटाशंकर तिवारी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल प्रभाव से हैंडपंपों को ठीक नहीं किया गया, तो वे गांव स्तर से हटकर जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन शुरू करने को विवश होंगे। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन उनकी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करना बंद करे।
जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों की एकजुटता
इस विरोध प्रदर्शन में गांव के प्रबुद्ध जनों और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से रमेश त्रिपाठी, गंगाराम, रिंचू प्रजापति और काशीनाथ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। सभी का एक ही स्वर था कि कड़ाके की ठंड में पानी के लिए दूरदराज के क्षेत्रों में जाना उनके लिए संभव नहीं है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों के इस उग्र रुख के बाद विभाग की नींद खुलती है या सुल्तानपुर की जनता को अभी और प्यासा रहना पड़ेगा।
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