4 हजार मिट्टी के दीयों से जगमगाएंगी 150 वनवासी परिवारों की झोपड़ियां, चंदौली के युवाओं की मिसाल
चंदौली के युवा पिछले 10 सालों से दीपावली पर वनवासी परिवारों के घर-घर दीये और खुशियां पहुंचा रहे हैं। जानिए कुम्हारों और बच्चों के लिए उनकी अनोखी पहल।
Govind KeshariSummary Highlights
4 हजार मिट्टी दीयों से जगमगाएंगी झोपड़ियां
150 वनवासी परिवारों के बीच बांटी जाएगी सामग्री
स्थानीय कुम्हारों से सीधे खरीदारी कर दिया रोजगार
बच्चों को शिक्षा सामग्री देकर संवार रहे भविष्य
पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन चला रहा अनोखा अभियान
दीपावली की खुशियां समाज के हर घर तक पहुंचे और पैसों की कमी के कारण किसी परिवार का त्योहार फीका न रहे, इसी सोच के साथ चंदौली जिले के युवा पिछले एक दशक से सेवा की अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं। पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन उत्तर प्रदेश की ओर से इस साल भी 6 और 7 नवंबर को दीपावली सेवा अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नौगढ़ के हिनौतघाट और चकिया के दिरेहूं गांव में 150 वनवासी परिवारों के बीच चार हजार मिट्टी के दीपक बांटे जाएंगे।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का लिया था संकल्प
वर्ष 2016 में बने इस फाउंडेशन के युवाओं ने करीब दस साल पहले स्वदेशी चीजों को बढ़ावा देने और जरूरतमंद परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां बांटने का संकल्प लिया था। तभी से हर दीपावली पर कुम्हारों से सीधे मिट्टी के दीये और खिलौने खरीदकर वनवासी बस्तियों तक पहुंचाने का सिलसिला लगातार जारी है। इस पहल के जरिए उन परिवारों तक भी उजाला पहुंचाया जा रहा है जो समाज के अंतिम छोर पर बसे हुए हैं।
कुम्हारों को घर बैठे मिल रहा रोजगार और सम्मान
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि फाउंडेशन के सदस्य बाजार से खरीदारी करने के बजाय सीधे कुम्हारों के घर पहुंचते हैं। इस वर्ष भी लगभग चार हजार मिट्टी के दीपक और 100 मिट्टी के खिलौने कुम्हारों से खरीदे जाएंगे। इससे स्थानीय कारीगरों को सीधे रोजगार मिलता है और उनकी पारंपरिक कला को बढ़ावा भी मिलता है। माटी कला से जुड़े जीतू प्रजापति बताते हैं कि जब लोग उनके घर आकर दीये खरीदते हैं, तो उनकी मेहनत का सम्मान होता है।
दीपक के साथ तेल, मिठाई और बच्चों के लिए खिलौने
फाउंडेशन की तरफ से वनवासी परिवारों को सिर्फ दीपक ही नहीं दिए जाते, बल्कि त्योहार मनाने के लिए जरूरी सामान भी दिया जाता है। इसमें तेल, मोमबत्ती, माचिस, लाई का पैकेट और मिठाई शामिल होती है। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए उन्हें मिट्टी के खिलौने और फूलझड़ियां दी जाती हैं। इस तरह पूरे परिवार के साथ मिलकर त्योहार मनाने का माहौल तैयार किया जाता है।
शिक्षा की रोशनी से संवार रहे बच्चों का भविष्य
यह सेवा अभियान सिर्फ दीपावली मनाने तक सीमित नहीं है। शिक्षा को बेहतर कल का आधार मानते हुए 50 बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल, सामान्य ज्ञान की किताबें और इंग्लिश स्पीकिंग की किताबें बांटी जाती हैं। इसके जरिए बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया जाता है। नौगढ़, बाघी, गहिला, विनायकपुर, जमसोती, गोडटुटवा, मूसाखाड़, पीतपुर, शिकारगंज, मुबारकपुर, हिनौतघाट, चकिया धरकार बस्ती, दिरेहूं और लालपुर जैसे कई गांवों तक यह अभियान पहुंच चुका है।
संवेदनशील सोच से आ रहा समाज में बदलाव
फाउंडेशन के प्रबंधक प्रशांत कुमार ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी को बढ़ावा देना और जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटना है। कुम्हारों को आर्थिक सहयोग देने और बच्चों को पढ़ाई का सामान देने का यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। यह पहल साबित करती है कि समाज में बदलाव लाने या खुशियां बांटने के लिए बड़े आयोजनों की नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सोच और सेवा के संकल्प की जरूरत होती है।
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