चंदौली में गेहूं खरीद पर 'बोरा संकट' का साया: केंद्रों पर पसरा सन्नाटा, बोरों की किल्लत पर किसान विकास मंच ने दी चेतावनी
चंदौली के गेहूं क्रय केंद्रों पर बोरों के अभाव में सरकारी खरीद ठप हो गई है। बाजार भाव कम होने से सरकारी केंद्रों पर निर्भर किसान अब आंदोलन की राह पर हैं। प्रशासन ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
सरकारी केंद्रों पर बोरों की भारी किल्लत
खरीद बंद होने से किसान परेशान और आक्रोशित
अंतरराष्ट्रीय कारणों से प्रभावित हुई बोरा आपूर्ति
जिलाधिकारी का घेराव करेंगे किसान संगठन
चंदौली जिले में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी के चलते किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इन दिनों जिले के अधिकांश गेहूं क्रय केंद्रों पर 'बोरा संकट' गहरा गया है। शहाबगंज और लटांव की मार्केटिंग शाखाओं से लेकर इलिया और खरौझा के पीसीएफ केंद्रों तक, हर जगह बोरों के अभाव में खरीद प्रक्रिया ठप पड़ी है। किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों पर तो पहुँच रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
बाजार भाव गिरने से सरकारी केंद्रों पर बढ़ी निर्भरता
पिछले तीन-चार वर्षों के विपरीत, इस साल बाजार में गेहूं का भाव अपेक्षाकृत कम है। यही कारण है कि किसान अपनी फसल निजी व्यापारियों को बेचने के बजाय सरकारी केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ लेना चाहते हैं। हालांकि, जब किसान केंद्रों पर पहुँच रहे हैं, तो केंद्र प्रभारी बोरा उपलब्ध न होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। किसानों का कहना है कि न तो व्यापारी उचित दाम दे रहे हैं और न ही सरकारी मशीनरी सहयोग कर रही है।
बोरा संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण?
जानकारों का मानना है कि बोरों की इस किल्लत के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ जिम्मेदार हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पेट्रोलियम आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे प्लास्टिक के बोरों का उत्पादन कम हुआ है। स्थिति को देखते हुए सरकार अब जूट के बोरों के विकल्प पर विचार कर रही है, लेकिन धरातल पर अभी तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। विपणन शाखा प्रभारी यतींद्र शुक्ला ने बताया कि विभाग के पास बजट की कमी नहीं है, केवल बोरों की उपलब्धता न होना ही मुख्य बाधा है।
किसान विकास मंच ने खोला मोर्चा
किसानों की इस समस्या को लेकर किसान विकास मंच के संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी और डिप्टी आरएमओ कार्यालय से संपर्क कर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर सभी केंद्रों पर बोरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, तो जिले के किसान एकजुट होकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक एक-एक किसान के दाने की तौल सुनिश्चित नहीं हो जाती।
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