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पर्यावरण संरक्षण की मिसाल: भीषण गर्मी में पौधों को बचाने के लिए चंदा जुटाकर युवाओं ने बिछाई 250 मीटर पाइपलाइन

चंदौली के शहाबगंज में युवाओं ने पर्यावरण प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। महारथपुर पोखरे के पौधों को सूखने से बचाने के लिए युवाओं ने खुद चंदा जमा कर 250 मीटर पाइप खरीदा और भीषण गर्मी व बिजली कटौती के बीच रात-रात भर जागकर पौधों को जीवनदान दे रहे हैं।

 
 

महारथपुर पोखरे के पौधों को बचाने की जिद

युवाओं ने चंदा जुटाकर खरीदी 250 मीटर पाइप

भीषण गर्मी और बिजली कटौती के बीच संघर्ष

तड़के 3 बजे से पौधों की सिंचाई का कार्य

पर्यावरण संरक्षण के लिए युवाओं की सराहनीय पहल

चंदौली जनपद अंतर्गत शहाबगंज क्षेत्र के महारथपुर पोखरे पर इन दिनों युवाओं का एक अलग ही जज्बा देखने को मिल रहा है। बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच पोखरे के किनारे लगाए गए नन्हे पौधों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। बाल्टी से पानी ढोकर पौधों को सींचना न केवल थकाने वाला था, बल्कि जल संकट के कारण यह पर्याप्त भी नहीं हो पा रहा था। ऐसे में पौधों को सूखता देख स्थानीय युवाओं ने उन्हें बचाने की ठान ली।

चंदा जुटाकर बिछाई 250 मीटर लंबी पाइपलाइन
पौधों को नया जीवन देने के लिए संसाधनों की कमी आड़े आई, तो युवाओं ने किसी सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय आपस में चंदा इकट्ठा करने का फैसला किया। इस राशि से युवाओं ने लगभग 250 मीटर लंबी पाइप खरीदी। इसके साथ ही पास के हैंडपंप में लगे सबमर्सिबल पंप की मरम्मत भी कराई गई, ताकि पानी की आपूर्ति दूर तक बिना किसी बाधा के सुनिश्चित की जा सके।

आधी रात से सुबह तक कठिन परिश्रम
पौधों की सिंचाई का यह कार्य आसान नहीं है। इलाके में हो रही भारी बिजली कटौती युवाओं के संकल्प की परीक्षा ले रही है। बुधवार की रात, जब दुनिया सो रही थी, तब कुछ उत्साही साथी तड़के 3 बजे ही पोखरे पर पहुंच गए। बिजली आने के इंतजार और फिर सिंचाई शुरू करने में उन्हें घंटों लग गए। हालात यह रहे कि तेज धूप होने के बावजूद सुबह 10 से 11 बजे तक युवा पसीने से तर-बतर होकर पौधों को पानी पिलाते रहे।

समाज के लिए प्रेरणा बना युवाओं का जुनून
इन युवाओं का एकमात्र लक्ष्य महारथपुर पोखरे के परिसर को हरा-भरा बनाना है। उनका मानना है कि यदि ये पौधे जीवित रहे, तो भविष्य में यहाँ टहलने आने वाले लोगों को स्वच्छ हवा और शीतल छाया मिल सकेगी। स्थानीय नागरिकों ने युवाओं के इस निस्वार्थ प्रयास की जमकर सराहना की है। युवाओं का यह कार्य यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी कभी भी नेक काम में बाधा नहीं बन सकती।

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