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अपने जान की परवाह किए बगैर विवाहिता बेटी ने शिक्षक पिता को डोनेट किया अपना लीवर, पिता को मिली नयी जिंदगी

पिता के जीवन के लिए उसने खुद की परवाह नहीं की। और होनहार बेटी के पति तथा उसकी ससुराल वालों ने भी पिता की जान बचाने के लिए उनकी बेटी द्वारा लिए गए इस निर्णय में भरपूर सहयोग किया।
 

खरौझा गांव की बेटी रुचि पांडेय ने दिखाई अनूठी मिसाल

बेटी ने अपने जीवन की परवाह किए बिना किया बलिदान

बेटी रुचि के कार्यों में ससुराल के लोगों का भी रहा सराहनीय योगदान

होनहार बेटी रुचि पांडेय की खूब हो रही है सराहना

चंदौली जिला के चकिया तहसील अंतर्गत गंभीर बीमारी से जूझ रहे पिता खरौझा गांव निवासी राजेश पांडेय की जान बचाने के लिए उनकी नवविवाहित बेटी रुचि पांडेय उर्फ छोटी ने अपना लीवर दे दिया। कंप्यूटर साइंस और बीएचयू से एमबीए करने के बाद रुचि की शादी कुछ महीने पहले हुई थी। पिता के जीवन के लिए उसने खुद की परवाह नहीं की। और होनहार बेटी के पति तथा उसकी ससुराल वालों ने भी पिता की जान बचाने के लिए उनकी बेटी द्वारा लिए गए इस निर्णय में भरपूर सहयोग किया।

बताते चलें कि चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र के खरौझा गांव निवासी राजेश पांडेय शहाबगंज विकासखंड के सीहर ग्राम स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। वह पिछले वर्ष से लीवर सिरोसिस से पीड़ित थे। उनका 90 प्रतिशत लीवर खराब हो चुका था। वाराणसी के चिकित्सकों ने लीवर ट्रांसप्लांट कराने का सलाह दी तो बेटी अपना लीवर देने के लिए तैयार हो गई।

 इसके बाद नई दिल्ली के आईएलबीएस (इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंस) में उनका लीवर ट्रांसप्लांट किया गया। डॉ. एसके सरिन और डॉ. विनियेंद्र पमेचा की टीम ने उनका सफल आपरेशन किया है। रुचि के  मौसा ज्ञान प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि इस समय पिता और बेटी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।

बेटी रुचि पांडेय द्वारा अपनी जान की परवाह किये बगैर पिता की जान बचाने के लिए अपना लिवर दिया है इसके लिए उसकी खूब प्रशंसा हो रही है।और हर लोगों के जुबान पर यह है कि आज बेटियां बेटे से किसी भी मामले में कहीं से भी कम नहीं है। अपना लवर देकर रुचि नहीं है यह साबित कर दिया है कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि जिंदगी का दूसरा नाम है।

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