धन्नीपुर में श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन: भगवान व्यास देव की महिमा और सदाचार का संदेश, गूंजा 'राधे-राधे' का जयकारा
चकिया के धन्नीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन वृंदावन के व्रजरज दास महाराज ने व्यास देव की महिमा और सच्चे पंडित की परिभाषा बताई। उन्होंने श्रद्धालुओं को व्यसन त्यागकर सात्विक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
धन्नीपुर में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव
व्रजरज दास जी महाराज का दिव्य प्रवचन
सच्चे पंडित और सदाचार की व्याख्या
नशा और मांसाहार त्यागने का आह्वान
राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई 11 मार्च को
चंदौली जिले की चकिया तहसील क्षेत्र के धन्नीपुर गांव में राधा कृष्ण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति और श्रद्धा की बयार बही। कथा के तृतीय दिवस पर वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक व्रजरज दास जी महाराज ने भगवान व्यास देव की महिमा और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। भक्ति भाव से भरे इस कार्यक्रम में धन्नीपुर और आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

शास्त्रों का ज्ञान और सच्चे पंडित की परिभाषा
कथा वाचक व्रजरज दास जी महाराज ने 'पंडित' शब्द की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि पंडित केवल वह नहीं है जिसके पास किताबी ज्ञान हो, बल्कि सच्चा पंडित वह है जो शास्त्रों के आदर्शों को अपने आचरण में उतारता है। उन्होंने विनम्रता, सेवा भाव और सदाचार को ज्ञान की कसौटी बताया। महाराज जी ने वेदों और पुराणों के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास ने संसार को ज्ञान का जो प्रकाश दिया है, वही सनातन धर्म का मूल आधार है।

सात्विक जीवन और व्यसन मुक्ति का संदेश
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज जी ने मानव जीवन को ईश्वर का अनमोल उपहार बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मन की शुद्धि के लिए सात्विक आहार और सात्विक विचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने लोगों से नशा, मदिरा और मांसाहार जैसे तामसिक भोजन से दूर रहने का कड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन बुराइयों से न केवल स्वास्थ्य बिगड़ता है, बल्कि व्यक्ति के संस्कार और विचार भी दूषित हो जाते हैं, जिससे परिवार और समाज में अशांति फैलती है।
भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु
कथा के दौरान जब महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का वर्णन किया, तो पूरा पंडाल "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयकारों से गूंज उठा। संगीत की धुनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों ने कथा वाचक का स्वागत किया और समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने के लिए ऐसे आयोजनों को जरूरी बताया।
कार्यक्रम में त्यागी जी महाराज, बबलू यादव, राम स्वारथ यादव, राम निहोर यादव, विजय विश्वकर्मा, कमलेश यादव, अशोक विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं उपस्थित रहीं।
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