भारतीय पंचांग केवल समय की गणना नहीं, बल्कि विज्ञान और संस्कृति का संगम है: डॉ. परशुराम सिंह
भारतीय संस्कृति रक्षा राष्ट्र सृजन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. परशुराम सिंह ने हिंदू नववर्ष पर पंचांग की महत्ता बताई। उन्होंने इसे खगोल विज्ञान और धर्म का अद्भुत समन्वय बताते हुए आधुनिक युग में भी इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया।
भारतीय पंचांग के पांच महत्वपूर्ण अंग
तिथि और नक्षत्र का वैज्ञानिक आधार
शुभ कार्यों में पंचांग की भूमिका
खगोलशास्त्र और ज्योतिष का सटीक समन्वय
प्रकृति के साथ सामंजस्य का मार्ग
चंदौली जनपद के चकिया तहसील अंतर्गत कटवां माफी गांव के निवासी और 'भारतीय संस्कृति रक्षा धर्म व राष्ट्र सृजन' के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. परशुराम सिंह ने हिंदू नववर्ष के शुभ अवसर पर भारतीय पंचांग की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि हमारा पंचांग केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि यह हमारी सभ्यता, धर्म और प्राचीन विज्ञान का एक ऐसा समन्वित स्वरूप है, जो मानव जीवन के सूक्ष्म से सूक्ष्म पहलू को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
पंचांग के पांच अंग और उनका वैज्ञानिक आधार
डॉ. सिंह ने विस्तार से समझाते हुए बताया कि 'पंचांग' शब्द का अर्थ ही 'पांच अंगों से युक्त' होना है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि तिथि का निर्धारण चंद्रमा की कलाओं और उसकी गति के आधार पर होता है, जबकि नक्षत्र चंद्रमा की आकाशीय स्थिति को दर्शाते हैं। वार, योग और करण सूर्य व चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति पर आधारित होते हैं। यह गणना इतनी सटीक है कि हज़ारों वर्ष पहले भी हमारे ऋषियों ने ग्रहों की स्थिति का जो अनुमान लगाया था, वह आज के आधुनिक खगोल विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतरता है।
धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक एकरूपता
भारतीय समाज में पंचांग की भूमिका पर चर्चा करते हुए डॉ. परशुराम सिंह ने कहा कि दीपावली, होली, मकर संक्रांति और दशहरा जैसे महापर्व पंचांग की गणना के आधार पर ही मनाए जाते हैं। यही कारण है कि पूरे देश में सांस्कृतिक एकरूपता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि कोई भी शुभ कार्य, चाहे वह भवन निर्माण हो, विवाह हो या लंबी यात्रा, पंचांग के मार्गदर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। यह हमें सही समय (मुहूर्त) का ज्ञान कराकर कार्यों में सफलता और सकारात्मक ऊर्जा सुनिश्चित करता है।
आधुनिक युग में प्रासंगिकता और संरक्षण की अपील
डिजिटल दौर में भी पंचांग की उपयोगिता को अनिवार्य बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भले ही आज हम मोबाइल कैलेंडर का उपयोग करते हैं, लेकिन प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने के लिए पंचांग ही एकमात्र मार्गदर्शक है। यह कृषि कार्यों से लेकर स्वास्थ्य और मानसिक शांति तक के लिए नियम निर्धारित करता है। उन्होंने अंत में समस्त नागरिकों से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और भारतीय पंचांग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। डॉ. सिंह के अनुसार, अपनी समृद्ध परंपराओं को सहेजना और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना ही राष्ट्र निर्माण की दिशा में सबसे बड़ा योगदान है।
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