अक्षय तृतीया विशेष: भगवान परशुराम क्षत्रिय विरोधी नहीं, अत्याचारियों के काल थे: वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर डॉ. परशुराम सिंह ने भगवान परशुराम के वास्तविक स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान परशुराम किसी जाति के नहीं बल्कि अन्याय और उदंडता के विरोधी थे और उनका जीवन समाज को समानता का संदेश देता है।
भगवान परशुराम को क्षत्रिय विरोधी बताना गलत
अन्याय और अत्याचार के खिलाफ शस्त्र उठाने का संदेश
धर्म और न्याय की स्थापना के सच्चे पुरोधा
डॉ. परशुराम सिंह द्वारा भगवान परशुराम के आदर्शों की व्याख्या
समाज में समानता और सद्भाव स्थापित करने की अपील
चंदौली जिले की चकिया तहसील अंतर्गत कटवां माफी गांव में अक्षय तृतीया की पूर्व संध्या पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय सनातन धर्म रक्षा संघ एवं राष्ट्र सृजन अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह ने अपने आवास पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए भगवान परशुराम के जीवन से जुड़ी ऐतिहासिक भ्रांतियों पर विराम लगाया। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि भगवान परशुराम को 'क्षत्रिय विरोधी' कहना धार्मिक और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने जैसा है।
अत्याचारी शासकों के विरुद्ध था संघर्ष
डॉ. परशुराम सिंह ने भगवान परशुराम के जीवन दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा कि वे किसी जाति विशेष के शत्रु नहीं थे। उनका संघर्ष उन उदंड और अत्याचारी शासकों के खिलाफ था, जो सत्ता के मद में चूर होकर प्रजा का शोषण कर रहे थे और धर्म के मार्ग से भटक गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में संतुलन और न्याय की पुनर्स्थापना के लिए ही भगवान परशुराम ने शस्त्र (फरसा) उठाया था। उनका उद्देश्य जाति का विनाश नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अधर्म और आतंक का दमन करना था।
न्याय, सत्य और धर्म के पुरोधा
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक है। उनका जीवन हमें यह अमर संदेश देता है कि जब भी समाज में अन्याय और अत्याचार की सीमाएं लांघी जाएं, तब चुप रहना कायरता है। उसके विरुद्ध स्वर मुखर करना और संघर्ष करना ही सच्चा धर्म है। वे केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि न्याय और सत्य के रक्षक थे, जिन्होंने ऋषि परंपरा और वीरता के बीच अद्भुत सामंजस्य स्थापित किया।
समाज के निर्माण का संकल्प
अक्षय तृतीया के इस शुभ अवसर पर डॉ. परशुराम सिंह ने जनमानस से अपील की कि वे भगवान परशुराम के वास्तविक आदर्शों को समझें और उन्हें अपने आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय के खिलाफ एकजुट होंगे। एक स्वस्थ, सशक्त और सद्भावपूर्ण समाज का निर्माण तभी संभव है जब हम महापुरुषों के विचारों को संकीर्ण सीमाओं से बाहर निकालकर मानवता के कल्याण के लिए प्रयोग करेंगे। इस संवाद के माध्यम से उन्होंने युवा पीढ़ी को धर्म और राष्ट्र रक्षा के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।
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