खुद ही बीमार है इलिया का पशु चिकित्सालय, 'राम भरोसे' 35 गांवों के पशुओं की जान
चंदौली के इलिया पशु चिकित्सालय में पिछले दो वर्षों से डॉक्टर व स्टाफ न होने से 35 गांवों के पशुपालक परेशान हैं। किसान विकास मंच ने अस्पताल की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए जुलाई तक डॉक्टर की नियुक्ति न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
दो साल से बंद पशु अस्पताल
इलाज के अभाव में मरे बेजुबान
पैंतीस गांवों के पशुपालक बेहद परेशान
जुलाई में डॉक्टर नियुक्ति का आश्वासन
मांग पूरी न होने पर आंदोलन
चंदौली जिले के शहाबगंज विकास खंड क्षेत्र से सरकारी व्यवस्था की घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ के स्थानीय पशु चिकित्सालय इलिया की स्थिति वर्तमान में बद से बदतर हो चुकी है। हाल ही में किसान विकास मंच के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जब इस अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो वहां की दुर्दशा देखकर दंग रह गए।
अस्पताल की बाउंड्री से लेकर मुख्य गेट और अंदर के कमरों के दरवाजों पर ताले लटके हुए हैं। पूरे परिसर में झाड़-झंखाड़ और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है, जबकि इमारत की दीवारें जर्जर होकर ढह रही हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्षों से यहाँ कोई डॉक्टर, कंपाउंडर, चपरासी या नाइट गार्ड तैनात नहीं है।

35 गांवों के पशुपालक परेशान, 15 किमी दूर जाने की मजबूरी
इस सरकारी उदासीनता का भारी खामियाजा क्षेत्र के गरीब पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। इलिया के इस इकलौते पशु अस्पताल पर आसपास के लगभग 30 से 35 गांवों की बड़ी आबादी पूरी तरह निर्भर है। समय पर इलाज और डॉक्टर न मिलने के कारण आए दिन बेजुबान जानवर तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं।
आपातकालीन स्थिति में पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए यहाँ से 8 से 10 किलोमीटर दूर शहाबगंज या फिर 15 किलोमीटर दूर चकिया जाना पड़ता है। समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने की वजह से किसानों के पैसे और कीमती पशु दोनों ही बर्बाद हो रहे हैं।
जुलाई में डॉक्टर की तैनाती का आश्वासन, वरना होगा उग्र आंदोलन
अस्पताल की इस बदहाली को लेकर किसान विकास मंच के संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) डॉ. योगेश कुमार मौर्य को मामले की गंभीरता से अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि अस्पताल में जल्द से जल्द पशु चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति की जाए। वहीं ब्लॉक अध्यक्ष अशोक कुमार द्विवेदी ने जिलाधिकारी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि बेजुबान पशुओं को बेमौत मरने से बचाया जा सके।
इस शिकायत पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश कुमार मौर्य ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया है कि जुलाई महीने की शुरुआत में ही इलिया अस्पताल पर एक योग्य चिकित्सक की तैनाती कर दी जाएगी। हालांकि, किसान कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जुलाई में डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई, तो वे मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे और धरने पर बैठने के लिए बाध्य होंगे। इस निरीक्षण कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम अवध सिंह, अशोक कुमार द्विवेदी, अभय मौर्य, पीएन यादव और गोपाल यादव मौजूद रहे।
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