शहाबगंज के दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा: सफाई न होने और संकरे रेगुलेटर से अटकी पानी की निकासी
चंदौली के शहाबगंज में सिंचाई विभाग की लापरवाही से दर्जनों गांवों में धान की फसल डूब रही है। कैनाल में सफाई की कमी और संकरे रेगुलेटर से जलभराव बढ़ा है, जिससे गुस्साए किसानों ने अनशन की चेतावनी दी है।
सिंचाई विभाग की लापरवाही से किसान परेशान
लेहरा शाख नहर में जलभराव से डूबी फसल
संकरा रेगुलेटर बना बाढ़ की मुख्य वजह
दर्जनों गांवों की धान फसल पर मंडराया खतरा
समाधान न होने पर किसानों की अनशन चेतावनी
चंदौली जिले में सिंचाई विभाग की उदासीनता और लचर कार्यप्रणाली के कारण किसान बेहद परेशान हैं। कैनालों (नहरों) की समय पर और उचित सफाई न होने की वजह से खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों की लहलहाती धान की फसल डूब रही है। जिले में लगातार दो वर्षों से हो रही अत्यधिक बरसात और बाढ़ जैसी स्थिति ने किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खासतौर पर शहाबगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों में इस वक्त गंभीर जलभराव और बाढ़ का संकट मंडरा रहा है।

नहर में उगे पेड़-पौधे और अतिक्रमण बना पानी का अवरोध
समस्या की गंभीरता को देखते हुए किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने राइट कैनाल के लेहरा शाख पर पहाड़पुर के पास स्थलीय जायजा लिया। वहां नहर में उगे भारी घास-फूस, पेड़-पौधों और अतिक्रमण को देखकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि गर्मी के दिनों में सिंचाई विभाग ने केवल कागजी खानापूर्ति करते हुए आधी-अधूरी सफाई कराई थी। यही वजह है कि आज तेज बारिश के बाद नहर का पानी आगे नहीं निकल पा रहा है और वापस खेतों में फैल रहा है।

सकरा रेगुलेटर बना आफत, डबल गेट बनाने की मांग
किसान विकास मंच के कार्यकर्ता अरुण सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग न तो नहर की ढंग से सफाई करा रहा है और न ही इस विकराल बाढ़ की समस्या का जायजा लेने धरातल पर पहुंच रहा है। उन्होंने एक बड़ी तकनीकी खामी की ओर इशारा करते हुए बताया कि पहाड़पुर में पुरानी सकरी फाल टूटने के बाद विभाग ने जो नया रेगुलेटर बनाया है, वह आज की बदली परिस्थितियों में बेहद छोटा है। नहर काफी चौड़ी है, जबकि यह रेगुलेटर महज पांच से छह फुट चौड़ा है। यही संकरा रेगुलेटर पानी की निकासी में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस रेगुलेटर को हटाकर तुरंत डबल गेट का नया संरचना बनाया जाए, तभी क्षेत्र को बाढ़ से मुक्ति मिल सकती है।

'निस्तारण नहीं हुआ तो पैदावार हो जाएगी शून्य'
किसान नेता राजन पांडेय ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बीते वर्ष भी इसी बाढ़ और जलभराव के कारण किसानों की उपज घटकर आधी से एक-तिहाई रह गई थी। अगर इस वर्ष भी पानी की निकासी में इसी तरह का अवरोध बना रहा, तो खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह सड़ जाएंगी और किसानों की पैदावार शून्य पर पहुंच जाएगी। इससे क्षेत्र के सैकड़ों किसान पाई-पाई को मोहताज हो जाएंगे।
दर्जनों गांवों पर असर, अधिकारियों को भेजी गई फोटो-वीडियो, अनशन की चेतावनी
किसान विकास मंच के संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने बताया कि उन्होंने मौके की फोटो और वीडियो क्लिप तैयार कर सिंचाई विभाग के सभी उच्च अधिकारियों को भेज दी है और समस्या का तुरंत समाधान करने की गुहार लगाई है। लेहरा शाख और मसोई माइनर के जरिए ही अरारी, बेलासपुर, डुमरी, अमांव, भूसी, इटहिया, हड़ौरा और मसोईं सहित दर्जनों गांवों का बाढ़ का पानी बाहर निकलता है।
किसानों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सिंचाई विभाग ने गंभीरतापूर्वक इस समस्या का निस्तारण नहीं किया, तो किसान विवश होकर विभाग के खिलाफ उग्र अनशन और प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर अंबरीष कुमार पांडेय, अरुण सिंह, राम अवध सिंह, बिनायक सिंह, जयराज सिंह, रजनीकांत सिंह, शैलेश सिंह और जयप्रकाश सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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