इलिया इलाके में भीषण आग का तांडव: 7 बीघा पुआल और 6 बीघा भूसा जलकर राख, किसानों के पशुओं पर छाया संकट
चंदौली के इलिया में भीषण आग ने दो किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। दमकल टीम के देरी से पहुंचने के कारण 13 बीघा का चारा जलकर राख हो गया। पशुओं के सामने चारे का संकट गहरा गया है। पूरी खबर विस्तार से पढ़ें।
इलिया के निचोट कलां गांव में भीषण अग्निकांड
रामजी और भंगी यादव का 13 बीघा चारा खाक
दमकल विभाग पर एक घंटा देरी से पहुंचने का आरोप
पशुओं के लिए रखे नवेले (चारे) का भारी नुकसान
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से की मुआवजे की मांग
चंदौली जिले के इलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत निचोट कलां गांव के समीप शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक लगी भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस अग्निकांड में दो किसानों की साल भर की मेहनत और पशुओं का चारा चंद मिनटों में जलकर खाक हो गया। तेज हवाओं ने आग की लपटों को इतना भयावह बना दिया कि ग्रामीणों के लाख प्रयासों के बावजूद कुछ भी बचा पाना संभव नहीं हो सका।
लाखों का नुकसान: सात बीघा पुआल और छह बीघा भूसा जला
जानकारी के अनुसार, निचोट कलां मार्ग पर स्थित रामजी यादव के करीब सात बीघा खेत में रखा पुआल और भंगी यादव का छह बीघा भूसा आग की चपेट में आ गया। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि चारे का बड़ा ढेर राख के ढेर में तब्दील हो गया। इस घटना से किसानों के सामने अपने पशुओं को खिलाने के लिए चारे (नवेला) का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दोनों ही किसान इस भारी आर्थिक क्षति से टूट चुके हैं।
दमकल विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए फायर ब्रिगेड पर लापरवाही का आरोप लगाया है। चश्मदीदों का कहना है कि आग लगने के तुरंत बाद दमकल विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन टीम लगभग एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि फायर ब्रिगेड की गाड़ी समय रहते पहुंच जाती, तो आग को फैलने से रोका जा सकता था और नुकसान काफी कम होता। जब तक दमकल की गाड़ी पहुंची, तब तक सब कुछ जल चुका था।
मुआवजे की गुहार और जांच की मांग
आग लगने के कारणों का अभी तक सटीक पता नहीं चल पाया है, हालांकि संभावना जताई जा रही है कि किसी चिंगारी या अज्ञात लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद से पूरे गांव में मायूसी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लेखपाल से सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें। साथ ही, आपातकालीन सेवाओं की तत्परता सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
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