खुद 2 बार विधायक, पत्नी रहीं प्रमुख..फिर भी बाइक से चलते थे राजेश बहेलिया, जिले के एक सादगी वाले राजनेता के रुप में आएंगे याद
चकिया के पूर्व विधायक राजेश बहेलिया का निधन राजनीति के एक सादगी भरे दौर का अंत है। 1991 और 1993 में दो बार विधायक रहने के बावजूद जीवनभर मोटरसाइकिल से चलने वाले इस बेदाग जननेता के निधन से पूरे चंदौली जिले में गहरा शोक है।
90 के दशक के कद्दावर नेता
दो बार चकिया से रहे विधायक
मोटरसाइकिल पर चलने वाले बेदाग जननेता
परिवार का सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में दबदबा
चंदौली जिला की चकिया विधानसभा सीट के पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश बहेलिया का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह उस दौर की राजनीति का अंत है जो सादगी और जनसेवा पर आधारित थी। 1990 के दशक में जब उत्तर प्रदेश की राजनीति तेजी से बदल रही थी, तब उन्होंने लगातार दो बार विधायक बनकर चकिया क्षेत्र में अपनी एक अलग और बेहद मजबूत पहचान बनाई थी।

1991 और 1993 में हासिल की थी ऐतिहासिक जीत
383 सुरक्षित चकिया विधानसभा क्षेत्र से राजेश बहेलिया ने पहली बार 1991 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी। यह वह दौर था जब प्रदेश और देश में भाजपा का उभार हो रहा था। इसके बाद 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में भी उन्होंने अपनी लोकप्रिय छवि के दम पर जीत बरकरार रखी और दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। लगातार दो जीत ने उन्हें क्षेत्र के शीर्ष नेताओं की कतार में खड़ा कर दिया था।
सादगी ऐसी कि विधायक रहकर भी चलते थे मोटरसाइकिल से
आज के दौर में जहां राजनीति में पद के साथ भौतिक सुख-सुविधाओं और गाड़ियों का काफिला देखने को मिलता है, वहीं राजेश बहेलिया जी का जीवन एक अद्भुत मिसाल था। दो बार विधायक रहने के बाद भी उनकी मुख्य सवारी एक साधारण मोटरसाइकिल ही रही। उन्होंने कभी अपने लिए धन या ऐश्वर्य नहीं जुटाया। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी के बेहद करीब होने के बावजूद उन्होंने कभी इस निकटता का निजी लाभ नहीं उठाया और हमेशा निष्कलंक जीवन जिया।
पारिवारिक विरासत भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय
राजेश बहेलिया का परिवार भी हमेशा से जनसेवा से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी आभा रानी शहाबगंज विकासखंड की दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं। इस तरह बहेलिया परिवार का चकिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में बहुत लंबा और मजबूत जुड़ाव रहा है।
क्षेत्र में शोक की लहर
हृदय गति रुक जाने के कारण उनका असामयिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही चकिया और पूरे चंदौली जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम जनता में गहरा शोक व्याप्त हो गया। लोगों का कहना है कि उनके जाने से चंदौली की राजनीति से एक ऐसा निष्कलंक जननेता चला गया है जिसकी भरपाई कर पाना लगभग नामुमकिन है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
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