बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए कच्चे मकानों के बदले गरीबों को पक्के मकान दे सरकार, अजय राय की मांग
चंदौली में बाढ़ से कई इलाकों में तबाही
अजय राय ने मांगा किसानों को मुआवजा
खंडहर में रहने वाले गरीबों को दें प्रधानमंत्री आवास
धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जनपद में इस बार आई बाढ़ ने किसानों और गरीबों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गईं, तो वहीं सैकड़ों गरीबों के कच्चे मकान ढह गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद एआईपीएफ के राज्य कार्यसमिति सदस्य अजय राय ने सरकार और प्रशासन पर गलत नीतियों के चलते जनधन की हानि का आरोप लगाया है।
अजय राय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना की जमीनी हकीकत उजागर हो चुकी है, क्योंकि जिन लोगों को सरकार ने ‘छत’ दी होने का दावा किया, वे आज भी कच्चे मकानों में रह रहे हैं, जो बारिश और बाढ़ में गिर गए। अमरा दक्षिणी गांव में संतलाल, सोनी, रमेश, मीरा, किरण, गुलाब, सुनीता और केदार जैसे दर्जनों परिवारों के घर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं।

“बाढ़ में जिनके घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुआवजा के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिया जाना चाहिए,” अजय राय ने स्पष्ट तौर पर यह मांग उठाई। उन्होंने बताया कि भटपुरवा गांव के बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि दस परिवारों में सिर्फ दो पैकेट भोजन वितरित किया गया। कई जगह फोटोशूट के लिए राहत दी जाती है, जरूरत के हिसाब से नहीं।
उन्होंने प्रशासन पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ अधिकारी सक्रिय और संवेदनशील हैं, लेकिन कुछ लोग आपदा में अवसर की तलाश में हैं। वहीं उन्होंने चकिया तहसील के अमरा दक्षिणी गांव में बाढ़ की वजह बनी गड़ई नदी पर पुल न बनने और चंद्रप्रभा डैम की मरम्मत में लापरवाही जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए।
अजय राय ने कहा कि चंदौली जैसे जिले में जहां कई नहरें, बांध और बंधियां मौजूद हैं, वहां हर साल बाढ़ आना यह साबित करता है कि सिंचाई विभाग की ओर से समय पर मरम्मत और सफाई नहीं की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि बांधों और माइनरों की मरम्मत का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, और इसका खामियाजा किसानों और गरीबों को भुगतना पड़ता है।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों और सरकार से सवाल किया कि हर साल गंगा कटान और बाढ़ से लोग परेशान होते हैं, लेकिन बचाव के लिए ठोस योजनाएं क्यों नहीं बनाई जातीं? उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दलों और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इन मुद्दों को लेकर सदन से सड़क तक आवाज उठाएं।
अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि –
- बाढ़ से प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए।
- जिन गरीबों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें पीएम आवास योजना के तहत मकान दिया जाए।
- बांधों और नहरों की सफाई व मरम्मत की पारदर्शी व्यवस्था हो।
- राहत शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य और आवास की समुचित व्यवस्था की जाए।
अजय राय ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इन मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो हम जनता के साथ आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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