गोविंदीपुर गांव में भड़के ग्रामीण: तालाब की 2 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप, प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
चंदौली के गोविंदीपुर गांव में सार्वजनिक तालाब की 2 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। 2 साल से अफसरों के चक्कर काट रहे लोगों ने राजस्व विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा
दो साल से अधिकारी बेपरवाह
राजस्व विभाग पर मिलीभगत का आरोप
बरसात में जलभराव का बढ़ा खतरा
निष्पक्ष जांच और सीमांकन की मांग
चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड में आने वाले गोविंदीपुर गांव से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ ग्राम सभा के सार्वजनिक तालाब (पोखरे) की भूमि पर कुछ दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का मामला गरमा गया है। इस लापरवाही को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। दर्जनों की संख्या में ग्रामीण तालाब के पास जमा हो गए और उन्होंने प्रशासन के ढीले रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सरकारी जमीन को तुरंत खाली कराने की मांग की।

दो बीघा जमीन पर घेराबंदी, जल निकासी ठप
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव के इस पुराने पोखरे की करीब दो बीघा जमीन पर पिछले दो सालों से कुछ लोगों द्वारा लगातार अवैध कब्जा किया जा रहा है। अतिक्रमणकारियों ने पहले धीरे-धीरे तालाब की जमीन को दबाया और बाद में वहां बांस तथा पर्दा लगाकर उसकी पूरी घेराबंदी कर दी। इतना ही नहीं, तालाब को पूरी तरह पाटने की नीयत से उसमें धड़ल्ले से मिट्टी भी डलवाई जा रही है। इससे गांव में पानी के निकास का रास्ता बंद हो गया है और जल संकट भी गहरा रहा है।
अधिकारियों के चक्कर काट कर थक गए ग्रामीण
गांव के रहने वाले कमलेश चौहान, राजेश चौहान, राम प्रसाद चौहान, रमेश, विजय राजवंश, बीपी यादव, गुलाब चौहान, तारा, चंदा, राजकुमारी, फूलकुमारी और सुनीता समेत कई लोगों ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर वे पिछले दो सालों से जिलाधिकारी (DM) और उपजिलाधिकारी (SDM) के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध कब्जे के पीछे गांव के ही बिहारी चौहान का नाम सामने आ रहा है, जो विरोध करने पर लोगों को डराता-धमकाता भी है।
राजस्व विभाग की आधी-अधूरी कार्रवाई पर उठे सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक, बुधवार को लेखपाल मनीष बजरंग के साथ राजस्व विभाग की एक टीम गांव पहुंची थी। लेकिन टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना या जमीन का सही सीमांकन (नापी) किए बिना ही एक मड़ई को गिरा दिया और वापस लौट गई। इस आधी-अधूरी कार्रवाई से ग्रामीण बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट पैमाइश और नोटिस के ऐसी कार्रवाई से समस्या का हल नहीं निकलेगा, बल्कि इसमें विभाग की मिलीभगत साफ दिखती है। ग्रामीणों ने अब पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने और तालाब को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करने की मांग उठाई है।
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