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चंदौली के हड़ौरा में मनी भगत सिंह की 120वीं जयंती, नई पीढ़ी तक क्रांतिकारी विचारों को पहुंचाने का लिया संकल्प

चंदौली के हड़ौरा गांव में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 120वीं जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने भगत सिंह के समानता और शोषणमुक्त समाज के विचारों को आज के युवाओं और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

 
 

हड़ौरा में भगत सिंह विचार गोष्ठी

शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 120वीं जयंती

शोषणमुक्त और समान समाज का संदेश

युवाओं तक क्रांतिकारी विचार पहुंचाने की पहल

महात्मा गांधी और आंबेडकर के विचारों पर चर्चा

चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड स्थित हड़ौरा गांव में सोमवार को माहौल पूरी तरह वैचारिक चर्चाओं से सराबोर रहा। अवसर था देश के महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 120वीं जयंती का। इस खास मौके पर 'भगत सिंह विचार मंच' के तत्वावधान में एक भव्य विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में भगत सिंह के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान समय में उनके विचारों की जरूरत पर गहराई से मंथन हुआ।

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केवल आजादी नहीं, समानता के पक्षधर थे भगत सिंह
गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह का संघर्ष महज अंग्रेजों को देश से भगाने तक सीमित नहीं था। वे एक ऐसे भारत का सपना देखते थे जहां सामाजिक समानता हो, सबकी भागीदारी हो और कोई किसी का शोषण न कर सके। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आज के युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने में भगत सिंह के विचार सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।

पुष्पांजलि से आगे बढ़कर विचारों को अपनाने की जरूरत
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भगत सिंह को सिर्फ उनकी जयंती या शहादत दिवस पर याद कर लेना काफी नहीं है। उनके लिखे लेखों, किताबों और सामाजिक दृष्टिकोण को गहराई से पढ़ना होगा। आज के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक हालातों को समझने के लिए भगत सिंह के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। इसके बिना एक मजबूत समाज की कल्पना अधूरी है।

गांधी और आंबेडकर के विचारों पर भी हुआ मंथन
गोष्ठी में केवल भगत सिंह ही नहीं, बल्कि महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महान महापुरुषों के योगदान को भी याद किया गया।
वक्ताओं का मानना था कि आजादी के बाद देश के विकास मॉडल और लोकतांत्रिक ढांचे को समझने के लिए इन सभी महापुरुषों के संघर्षों का अध्ययन करना जरूरी है। सबने मिलकर देश के इतिहास और सामाजिक बदलाव पर विस्तार से अपनी बात रखी।

श्रद्धांजलि के साथ संवाद जारी रखने का संकल्प
कार्यक्रम का संचालन मंच के संयोजक डॉ. मिश्री लाल पासवान ने किया, जबकि अध्यक्षता रामजी यादव ने की। इस दौरान कामरेड श्याम बिहारी सिंह, वसीम अहमद, आनंद महामाया मार्गदर्शी, अलियार, रामकेश, रामअवध सिंह और करुणेश पांडेय समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अंत में सभी ने भगत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और सामाजिक सरोकारों पर इस तरह के संवाद लगातार जारी रखने का संकल्प लिया।

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