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किसान विकास मंच की गोष्ठी में नीतियों पर फूटा गुस्सा, बिजली की बढ़ती कीमतों और MSP गारंटी पर सरकार को घेरा

चंदौली के घोड़सारी में किसान विकास मंच की बैठक में धान की खेती, बिजली की बढ़ती कीमतों और सरकारी नीतियों पर तीखी चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी दखलअंदाजी और एमएसपी गारंटी कानून न बनने पर कड़ा आक्रोश जताया।

 
 

घोड़सारी गांव में किसान गोष्ठी का आयोजन

सिंचाई और बाढ़ निकासी पर विशेष फोकस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़े शब्दों में निंदा

1 जून से बढ़ती बिजली दरों का पुरजोर विरोध

हास्य व्यंग्य कवि बेचयी सिंह ने बांधा समां

चंदौली जिले में किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र के घोड़सारी गांव स्थित राजकुमार सिंह के आवास पर एक महत्वपूर्ण किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में क्षेत्र की खेती-बाड़ी और किसानों की जनजीविका से जुड़ी अनेक गंभीर समस्याओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। आगामी धान की रोपाई का सीजन नजदीक होने के कारण वक्ताओं ने सिंचाई और बाढ़ निकासी की दो प्रमुख ज्वलंत समस्याओं पर अपना मुख्य फोकस रखा।

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गोष्ठी को संबोधित करते हुए मंच के अध्यक्ष राधेश्याम पांडेय ने कहा कि वर्तमान में कोई भी सरकार एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) गारंटी कानून लागू नहीं कर रही है, इसलिए ऐसी सरकारों को किसी भी कीमत पर किसान हितैषी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस खेती को कभी समाज में सर्वोपरि यानी 'उत्तम' कहा जाता था, आज शासन की गलत और किसान विरोधी नीतियों के कारण उसे 'निम्नतम' पायदान पर धकेल दिया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तीखी निंदा
बैठक में भारत की खेती और जनजीविका पर अमेरिकी साम्राज्य द्वारा हो रहे हमलों पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की। संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी भारत के किसानों के लिए एक बहुत भारी खतरा बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पूरी तरह से ट्रंप के रिमोट कंट्रोल में काम कर रही है, जो भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का मान-मर्दन है।

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संगठन मंत्री ने किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, डीजल, खाद की कीमतें तथा बिजली और सिंचाई की नीतियां राजनीतिक हाथों से ही तय होती हैं। इसलिए किसानों को हमेशा राजनीति पर पैनी नजर रखनी चाहिए और किसान विरोधी ताकतों का राजनीतिक पर्दाफाश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई में करीब एक महीने का समय शेष है, इसलिए जून महीने के भीतर ही सिंचाई और बाढ़ निकासी के संसाधनों को आपसी सहयोग से दुरुस्त कर लेना चाहिए। इसके लिए सिंचाई विभाग और बंधी डिवीजन के खिलाफ आवाज उठाने के साथ-साथ स्थानीय सांसद, विधायक और त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाना चाहिए।

बिजली दरों में वृद्धि पर आक्रोश और जोरदार नारेबाजी
गोष्ठी के दौरान आपदा राहत मुआवजा, बाढ़ राहत राशि और गेहूं खरीद के मामले में सरकार को पूरी तरह फ्लॉप और नाकामयाब बताया गया। इसके साथ ही 1 जून से बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर किसानों ने सरकार की घोर निंदा की। इस दौरान कलेक्ट्रेट और ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन तेज करने की बात कही गई। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने "उठो छात्र मजदूर किसान, जाग रहा है हिन्दुस्तान" और "निकलो बंद मकानों से, संघर्ष करो बेईमानों से" जैसे गगनभेदी और जोरदार नारे लगाए।

गंभीर राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं के बीच माहौल को हल्का करने के लिए हास्य-व्यंग्य कवि बेचयी सिंह ने अपनी शानदार और चुटीली हास्य-व्यंग्य कविताओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को लोटपोट कर दिया और पूरे माहौल को हंसी-खुशी से भर दिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बेचयी सिंह ने की तथा कुशल संचालन संगठन मंत्री राम अवध सिंह द्वारा किया गया।

इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में मुख्य रूप से उपेंद्र सिंह, सुरेश मौर्य, भीष्म नारायण यादव, अनिल सिंह, राजकुमार सिंह, राजेश्वर सिंह, ओमप्रकाश सिंह, चंद्र सुधीर सिंह, रामप्रकाश सिंह, राम लाल, कन्हैया सिंह, अमित कुमार सिंह, गोविंद गुप्ता, अभिनव सिंह, बीरेंद्र सिंह, राम औतार सिंह, दिलीप सिंह, राम अनंत पांडेय, अंकित पांडेय, बलवंत सिंह और मनीष सिंह सहित क्षेत्र के सैकड़ों प्रगतिशील किसान व कार्यकर्ता सम्मिलित रहे।

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